उत्तराखण्ड
तस्वीरों में रंग और भावनाएं भर रहीं रानी अरोरा, कला के जरिए तलाश रहीं अपनी नई पहचान



बचपन से था कला का शौक, बेटे के एक छोटे से उपहार ने फिर जगाया कलाकार मन
हल्द्वानी। कला के प्रति लगाव और कुछ नया सीखने की चाहत उम्र की मोहताज नहीं होती। इसी सोच को अपने जीवन में उतारते हुए रानी अरोरा आज फोटो पेंटिंग के क्षेत्र में अपनी रचनात्मक पहचान बना रही हैं। उनकी बनाई फोटो पेंटिंग्स में रंगों के साथ भावनाओं और कल्पनाओं का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है।
रानी अरोरा बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही कला और चित्रकारी का शौक था। वह अपना स्कूल भी चलाती थीं, लेकिन समय के साथ जिम्मेदारियों और व्यस्तताओं के बीच उनका यह शौक कहीं पीछे छूट गया। हालांकि, कला के प्रति उनका लगाव उनके मन में हमेशा बना रहा।
वह अपने जीवन के उस खास प्रसंग को याद करते हुए बताती हैं कि एक दिन उनका बड़ा बेटा फैब्रिक कलर लेकर घर आया। उन्होंने सोचा कि शायद वह अपने लिए कलर लेकर आया है। कुछ देर बाद बेटे ने कहा, “मम्मी, मैं आपके लिए लाया हूं।” बेटे की यह छोटी-सी पहल उनके लिए खास प्रेरणा बन गई। इसके बाद उन्होंने दोबारा अपनी कला को समय देना शुरू किया और धीरे-धीरे फोटो पेंटिंग की ओर उनका रुझान बढ़ता गया।
रानी अरोरा कहती हैं कि आज उन्हें भी महसूस होता है कि जीवन में कुछ न कुछ रचनात्मक करते रहना चाहिए। वह अपने अन्य कार्यों में भी सक्रिय रहती हैं। रेस्टोरेंट के काम में भी कई बार उन्हें स्वयं जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें व्यस्त रहना पसंद है। उनका मानना है कि व्यक्ति को अपनी रुचि और प्रतिभा के लिए भी समय निकालना चाहिए।
उनकी फोटो पेंटिंग्स में तस्वीर की वास्तविकता के साथ रंगों और कल्पना की खूबसूरती दिखाई देती है। साधारण तस्वीर को कलात्मक रूप देकर उसमें भावनाओं का नया संसार रचने का उनका प्रयास उनकी रचनात्मक सोच को दर्शाता है।
रानी अरोरा का कहना है, “सीखने की कोई उम्र नहीं होती। हर व्यक्ति को अपनी कला और अपनी रुचि के क्षेत्र में कुछ न कुछ करते रहना चाहिए। जरूरी नहीं कि वह कला व्यवसाय बने, लेकिन अपने मन की खुशी और संतुष्टि के लिए अपनी रुचि को जरूर जीवित रखना चाहिए।”
उनका यह संदेश उन लोगों के लिए भी प्रेरणादायक है जो उम्र, व्यस्तता या जिम्मेदारियों के कारण अपनी प्रतिभा और शौक को पीछे छोड़ देते हैं। रानी अरोरा की कहानी बताती है कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर अपने भीतर छिपे कलाकार को फिर से जगाया जा सकता है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि मन में सीखने और कुछ नया करने की इच्छा बनी रहे।



