उत्तराखण्ड
KVM स्कूल में आग और कोचिंग सेंटर हादसों की चेतावनी: क्या बच्चों की सुरक्षा को लेकर हम अब भी गंभीर नहीं हैं?

यह घटना केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चेतावनी है। पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में आग तथा अन्य दुर्घटनाओं के मामले सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। राजधानी दिल्ली के कोचिंग सेंटर हादसे से लेकर अन्य राज्यों में सामने आई घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कई शिक्षण संस्थान सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे हैं।
कोचिंग सेक्टर में तो स्थिति और भी चिंताजनक दिखाई देती है। बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान संकरी गलियों, बहुमंजिला इमारतों और सीमित निकासी व्यवस्था वाले भवनों में संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर अग्निशमन उपकरण या तो उपलब्ध नहीं होते या केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित रहते हैं। विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के बीच सुरक्षा व्यवस्था अक्सर प्राथमिकता में नहीं रहती।
KVM स्कूल की घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या उत्तराखंड के स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का नियमित सुरक्षा ऑडिट किया जा रहा है? क्या बिजली की वायरिंग, मीटर, स्विच बोर्ड, कंप्यूटर लैब, फायर अलार्म सिस्टम और आपातकालीन निकास की समय-समय पर जांच होती है? क्या छात्रों और शिक्षकों को आपदा प्रबंधन तथा फायर ड्रिल का प्रशिक्षण दिया जाता है? इन सवालों के जवाब तलाशना अब जरूरी हो गया है।
स्कूल खुलने से पहले जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, अग्निशमन विभाग और स्थानीय निकायों को संयुक्त अभियान चलाकर सभी सरकारी, निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का व्यापक निरीक्षण करना चाहिए। सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। केवल नोटिस जारी कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को धरातल पर लागू करना होगा।
बच्चों और युवाओं के भविष्य को संवारने वाले संस्थान तभी सार्थक हैं जब वे उनके जीवन की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें। KVM स्कूल में लगी आग भले ही बिना किसी जनहानि के समाप्त हो गई हो, लेकिन यह एक बड़ा संदेश छोड़ गई है कि सुरक्षा में लापरवाही किसी भी दिन बड़े हादसे में बदल सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या हम इस घटना से सबक लेंगे, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेंगे? बच्चों की सुरक्षा के लिए जवाबदेही तय करने और सभी शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य सुरक्षा जांच सुनिश्चित करने का समय अब आ चुका है। शिक्षा के मंदिर और कोचिंग संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण के भी प्रतीक होने चाहिए।
