उत्तराखण्ड
हिमालयन आश्रम सतखोल आध्यात्मिक चेतना एवं सामाजिक सशक्तीकरण का उत्कृष्ट केन्द्र : राज्यपाल

आध्यात्मिक साधना की परम्परा और हिमालय की चेतना
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की भूमि सदियों से आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और मानव कल्याण की परम्परा की वाहक रही है। “हिमालय केवल पर्वतों का समूह नहीं, बल्कि ऐसी चेतना का प्रतीक है जो व्यक्ति को आत्म-अन्वेषण और आंतरिक यात्रा के लिए प्रेरित करता है,” उन्होंने स्पष्ट किया।
राज्यपाल ने कहा कि हिमालयन आश्रम सतखोल न केवल ध्यान और आध्यात्मिक साधना का केन्द्र है, बल्कि समाज के समग्र विकास के लिए भी प्रेरणादायी कार्य कर रहा है।
ध्यान: स्वयं से जोड़ने का माध्यम
राज्यपाल ने वर्तमान समय की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि “वर्तमान समय में व्यक्ति अनेक जिम्मेदारियों, चुनौतियों और व्यस्तताओं से घिरा हुआ है। ऐसे समय में ध्यान व्यक्ति को स्वयं से जुड़ने, मानसिक संतुलन स्थापित करने तथा जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।”
“जब व्यक्ति का मन शांत और संतुलन होता है, तभी वह परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर सकता है,” राज्यपाल ने जोड़ते हुए कहा।
हैदराबाद के हार्टफुलनेस केन्द्र का अनुभव
राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें पूर्व में हैदराबाद स्थित हार्टफुलनेस के वैश्विक केन्द्र के भ्रमण का अवसर प्राप्त हुआ था। “वहां उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया कि किस प्रकार ध्यान, आत्मिक विकास और मानवीय मूल्यों के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है,” उन्होंने बताया।
राज्यपाल ने आध्यात्मिकता की सार्वभौमिकता पर बल देते हुए कहा कि “आध्यात्मिकता किसी एक स्थान, समुदाय या परम्परा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति की सार्वभौमिक आवश्यकता है।”
सतखोल का प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक वातावरण
राज्यपाल ने कहा कि सतखोल का प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक वातावरण व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने आश्रम द्वारा बच्चों के लिए संचालित ‘ब्राइटर माइंड्स’ कार्यक्रम तथा किसानों के लिए सुगंधित एवं औषधीय पौधों के संवर्धन संबंधी प्रयासों की सराहना की।
“किसी भी समाज का भविष्य बच्चों की प्रतिभा और किसानों की समृद्धि पर आधारित होता है तथा इन दोनों क्षेत्रों में किया गया निवेश राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव तैयार करता है,” राज्यपाल ने कहा।
विज्ञान-प्रौद्योगिकी युग में मानसिक संतुलन का महत्व
उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के इस युग में भौतिक प्रगति के साथ-साथ मानसिक संतुलन, आत्मानुशासन और आंतरिक शांति का महत्व और अधिक बढ़ गया है। “उत्तराखण्ड के विकास में भी आधुनिकता और परम्परा, विकास और पर्यावरण तथा भौतिक उन्नति और आध्यात्मिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है,” राज्यपाल ने स्पष्ट किया।
आश्रम के कार्यों की सराहना और भविष्य की आशा
राज्यपाल ने हिमालयन आश्रम सतखोल द्वारा किए जा रहे आध्यात्मिक एवं जनहितकारी कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि आश्रम भविष्य में भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
इस कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, आश्रम के साधक-साधिकाओं एवं सामाजिक अवधारणाओं से जुड़े वर्षों की उपस्थिति रही थी। हिमालयन आश्रम सतखोल पिछले कई वर्षों से ध्यान, आध्यात्मिक साधना और सामाजिक सशक्तीकरण के कार्यों में निरंतर सक्रिय है।
