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उत्तराखण्ड

H1N1 को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सलाह, लक्षण दिखें तो बरतें सावधानी,, डॉ परमजीत सिंह 

हल्द्वानी, । मानसून के दौरान बढ़ी नमी के बीच वायरल और श्वसन संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। स्वाइन फ्लू (H1N1) को लेकर विशेषज्ञों ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने और बीमारी के शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेने की अपील की है।

राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के जनरल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं H1N1 के नोडल अधिकारी डॉ. परमजीत सिंह के अनुसार स्वाइन फ्लू एक मौसमी वायरल संक्रमण है, जिसका समय पर पता चलने पर उपचार और प्रबंधन संभव है। उन्होंने बताया कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने अथवा बातचीत के दौरान निकलने वाली बूंदों से संक्रमण फैल सकता है। संक्रमित सतहों को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा रहता है।

उन्होंने बताया कि तेज बुखार, ठंड लगना, सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, थकान और कमजोरी इसके प्रमुख लक्षण हैं। कुछ मरीजों में उल्टी, जी मिचलाना और दस्त जैसी शिकायतें भी सामने आ सकती हैं।

विशेषज्ञों ने संक्रमण से बचाव के लिए नियमित रूप से हाथ धोने, भीड़भाड़ वाले स्थानों और अस्पतालों में मास्क पहनने तथा खांसते-छींकते समय मुंह और नाक ढकने की सलाह दी है। लक्षण होने पर घर पर आराम करने और सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचने को कहा गया है।

डॉक्टरों के मुताबिक स्वाइन फ्लू वायरल बीमारी है, इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए। बुखार की स्थिति में दवा का इस्तेमाल भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना उचित है।

गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा, मधुमेह, हृदय, किडनी या कैंसर जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। इन वर्गों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।

विशेषज्ञों ने बताया कि सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या दबाव, होंठ अथवा चेहरे का नीला पड़ना, लगातार उल्टी, अत्यधिक कमजोरी, असामान्य सुस्ती या बेहोशी जैसे लक्षण गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाइन फ्लू को लेकर अफवाहों और अनावश्यक भय से बचने की जरूरत है। जागरूकता, स्वच्छता, सावधानी और समय पर उपचार संक्रमण के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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