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उत्तराखण्ड

राज्यपाल ने लोक भवन में श्री देव सुमन विवि के AI चैटबॉट ‘प्रज्ञानम्’ का किया लोकार्पण,,



भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम, छात्र‑शोधकर्ताओं को डिजिटल माध्यम से मिलेगा विश्वसनीय ज्ञान
देहरादून। उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने आज लोक भवन में श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किए गए एआई चैटबॉट ‘प्रज्ञानम्’ का लोकार्पण किया।

यह प्लेटफॉर्म भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक से जोड़ने की दिशा में विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
चैटबॉट की खासियत
‘प्रज्ञानम्’ विशेष रूप से वेद, उपनिषद, पुराण, प्राचीन भारतीय गणित, नाट्यशास्त्र, संगीत, आयुर्वेद, दर्शन और भारतीय विज्ञान जैसे विषयों पर आधारित विस्तृत डेटाबेस पर काम करता है।

इसके माध्यम से विद्यार्थी, शोधार्थी और आम नागरिक भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े प्रश्नों के शोध‑आधारित, सटीक और संदर्भित उत्तर डिजिटल रूप में आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

चैटबॉट अब https://pragyanam.live/ पर ऑनलाइन उपलब्ध है, जहाँ कोई भी उपयोगकर्ता इसका लाभ ले सकता है।
राज्यपाल ने क्या कहा
लोकार्पण कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा—वेद, पुराण, उपनिषद और प्राचीन सभ्यता में निहित ज्ञान—21वीं सदी में भी पूर्ण रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि ‘प्रज्ञानम्’ जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस अमूल्य ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा सकता है और यह केवल सवालों का जवाब देने तक सीमित न रहकर, शोध‑आधारित विश्वसनीय जानकारी पर आधारित भारतीय ज्ञान की गहराई से परिचित कराएगा।
उन्होंने बताया कि यह परियोजना विश्वविद्यालय के ‘वन यूनिवर्सिटी‑वन रिसर्च’ पहल के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली पर लगभग एक वर्ष के गहन शोध, दो शोध‑पुस्तकों के निर्माण तथा राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों के आधार पर विकसित की गई है।

राज्यपाल ने युवाओं को तकनीक से ऊर्जित जोड़ते हुए कहा कि ‘प्रज्ञानम्’ उन्हें अपनी जड़ों, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा और उत्तराखण्ड की इस ज्ञान‑पहल को वैश्विक स्तर तक पहुँचाना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
विश्वविद्यालय और अन्य गणमान्यों की भागीदारी
कार्यक्रम में श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एन. के. जोशी ने राज्यपाल के समक्ष ‘प्रज्ञानम्’ की कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

सचिव राज्यपाल श्री रविनाथ रामन, विधि परामर्शी श्री कौशल किशोर शुक्ल, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली वानिकी विश्वविद्यालय, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय और उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति, ऋषिकेश और हरिद्वार के प्रमुख आश्रमों के महंत‑संत तथा विश्वविद्यालय के छात्र‑छात्राएँ भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की गरिमामय वातावरण ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक युग के बीच सेतु बनाने के इस प्रयोग को विशेष महत्व दिया।

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