उत्तराखण्ड
करोड़ों की धोखाधड़ी और संगठित अपराध के आरोपी धनंजय गिरी को नहीं मिली जमानत

अभियुक्त के खिलाफ थाना काठगोदाम में एफआईआर संख्या 94/2025 के तहत धारा 111(2)(बी) और 111(4) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत मुकदमा दर्ज है। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने सहयोगियों के साथ मिलकर एक संगठित सिंडिकेट बनाकर लोगों को फ्लैट और भूमि बिक्री के नाम पर धोखा दिया तथा करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ अर्जित किया। जांच में बैंकों से लिए गए करोड़ों रुपये के ऋण, बंधक संपत्तियों के विक्रय और कर देनदारियों से जुड़े गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
अदालत में अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ पिछले दस वर्षों में कई आपराधिक मामलों में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं और संबंधित न्यायालयों ने उनका संज्ञान भी लिया है। ऐसे में आरोपी को जमानत दिए जाने पर उसके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने तथा साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका बनी हुई है।
वहीं बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और वह किसी आपराधिक सिंडिकेट का सदस्य नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि मूल विवाद वर्ष 2017 का है और संपत्ति निर्माण कार्य अभी भी जारी है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी के विरुद्ध संगठित अपराध से संबंधित आरोपों की जांच के पर्याप्त आधार मौजूद हैं। न्यायालय ने अपराध की प्रकृति को गंभीर मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
अपने आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धनंजय गिरी की जमानत प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता है। साथ ही अभियुक्त के न्यायिक अभिरक्षा में होने के कारण आदेश की प्रति संबंधित कारागार को भेजने तथा बचाव पक्ष के अधिवक्ता को निःशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए
