उत्तराखण्ड
चौबट्टाखाल को बड़ी सौगात: सतपाल महाराज के प्रयासों से ₹123.41 करोड़ की ‘स्यूंसी झील’ परियोजना की निविदा प्रक्रिया शुरू

अजय सिंह
पौड़ी:उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री एवं चौबट्टाखाल के विधायक सतपाल महाराज के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘सतपुली झील’ की प्रशासनिक मंजूरी के बाद, क्षेत्र के विकास को एक और बड़ी गति मिली है। उनके विशेष प्रयासों के चलते अब बीरोंखाल विकासखंड में प्रस्तावित स्यूंसी झील (बहुउद्देशीय स्यूंसी बैराज) परियोजना के लिए ई-टेण्डरिंग की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹12,341.56 लाख (लगभग 123.41 करोड़ रुपये) है।
मुख्यमंत्री घोषणा के तहत धरातल पर उतरेगी योजना
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने इस प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत इस योजना को मंजूरी दी गई थी, जो अब जल्द ही धरातल पर नजर आएगी। उन्होंने इस जनहितैषी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विशेष आभार प्रकट किया है।
परियोजना की तकनीकी रूपरेखा और विशेषताएं
जनपद मुख्यालय से लगभग 135 किलोमीटर दूर, राष्ट्रीय राजमार्ग-121 पर स्यूंसी बाजार के समीप बंगार झूला पुल के डाउनस्ट्रीम में इस बैराज का निर्माण किया जाएगा।
बैराज का आकार: यह प्रस्तावित स्यूंसी बैराज 6 मीटर ऊंचा और 60 मीटर चौड़ा होगा।
गेट प्रणाली: पानी के सुचारू प्रवाह और नियंत्रण के लिए इसमें 10×6.5 मीटर के 6 अत्याधुनिक गेट लगाए जाएंगे।
झील का विस्तार: बैराज के निर्माण से लगभग 0.700 किलोमीटर (700 मीटर) लंबी एक भव्य कृत्रिम झील का निर्माण होगा।
डिजाइन: योजना का हाइड्रोलिक और स्ट्रक्चरल डिजाइन देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार किया गया है।
सिंचाई, पेयजल और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
सतपाल महाराज ने योजना के बहुआयामी लाभों को रेखांकित करते हुए बताया कि इस जलाशय का निर्माण केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार बनेगा:
कृषि को लाभ: बैराज बनने से क्षेत्र की लगभग 44 हेक्टेयर कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा मिलेगी।
पेयजल संकट का समाधान: क्षेत्र के 56 गांवों को बारहमासी और निर्बाध पेयजल आपूर्ति संभव हो सकेगी।
आर्थिक विकास: झील के माध्यम से क्षेत्र में मत्स्य पालन, नौकायन और पर्यटन की गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
जल संरक्षण: यह परियोजना जल संवर्द्धन और भूजल स्तर को सुधारने में भी मील का पत्थर साबित होगी।
बेहतर कनेक्टिविटी से सुधरेगा ग्रामीणों का जीवन
परियोजना के तहत स्यूंसी बैराज पर एक टू-लेन पुल और टू-लेन एप्रोच रोड का प्रावधान किया गया है। यह पुल बंगार ग्राम को सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग-309 (NH-309) से जोड़ेगा। इससे पूर्वी नयार नदी के दाएं तट पर बसे बंगार और मंगरौ जैसे सुदूर गांवों के नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य और किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित व बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
कैबिनेट मंत्री का वक्तव्य:
“₹12341.56 लाख की इस वृहद कार्ययोजना को अंतिम मंजूरी के लिए शासन को भेजा जा चुका है, जहां प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है। कार्य को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से, अग्रिम तौर पर ई-टेण्डरिंग की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।”
