उत्तराखण्ड
शासन से सेवा की ओर बढ़ रहा प्रशासनिक ढांचा : डॉ. जितेंद्र सिंह

12 वर्षों में नौकरशाही में व्यापक सुधार का दावा, शिकायत निस्तारण का समय 157 दिन से घटकर 15 दिन हुआ
नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पिछले 12 वर्षों में देश के प्रशासनिक ढांचे में व्यापक और समयबद्ध सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन से विरासत में मिले ‘स्टील फ्रेम’ को अब शासन करने के बजाय जनता की सेवा करने वाली व्यवस्था में बदला जा रहा है।
डॉ. सिंह ने अपने लेख में कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में औपनिवेशिक दौर की अनेक प्रक्रियाएं बनी रहीं। उनका उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के बजाय प्रक्रिया और नियंत्रण को प्राथमिकता देना था। वर्ष 2014 में केंद्र सरकार के समक्ष दर्ज नागरिक शिकायतों के निस्तारण में औसतन 157 दिन लगते थे, जो अब घटकर करीब 15 दिन रह गए हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) के माध्यम से शिकायतों के निस्तारण की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वार्षिक शिकायत निस्तारण करीब तीन लाख से बढ़कर लगभग 27 लाख हो गया है, जबकि शिकायतों के समाधान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की संख्या बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई है। CPGRAMS अब 22 भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध करा रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने की सुविधा भी विकसित की गई है।
नियम आधारित व्यवस्था से भूमिका आधारित प्रशासन की ओर
डॉ. सिंह के अनुसार प्रशासनिक सुधार केवल डिजिटल तकनीक तक सीमित नहीं हैं। वर्ष 2020 में शुरू किए गए मिशन कर्मयोगी के माध्यम से सरकारी कर्मचारियों को ‘नियम आधारित’ व्यवस्था से ‘भूमिका आधारित’ कार्यसंस्कृति की ओर ले जाने का प्रयास किया गया है। iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर सरकारी कर्मचारियों के लिए हजारों पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं और प्रशिक्षण को अधिकारियों के प्रदर्शन मूल्यांकन से जोड़ने की दिशा में भी काम किया गया है।
भर्ती प्रक्रिया से हटाई गईं औपनिवेशिक परंपराएं
डॉ. सिंह ने कहा कि वर्ष 2016 से केंद्र सरकार की ग्रुप-सी और गैर-राजपत्रित ग्रुप-बी की अनेक नौकरियों में साक्षात्कार समाप्त किया गया। इसके अलावा सरकारी प्रपत्रों के लिए राजपत्रित अधिकारी से सत्यापन कराने की पुरानी व्यवस्था को भी समाप्त किया गया। सफल अभ्यर्थियों को पुलिस सत्यापन पूरा होने तक अनावश्यक रूप से प्रतीक्षा कराने के बजाय अस्थायी रूप से सेवा में शामिल करने की व्यवस्था लागू की गई। उनके अनुसार 1,600 से अधिक अप्रचलित कानूनों को भी समाप्त किया गया है।
महिला कर्मचारियों के लिए सुविधाओं का विस्तार
लेख में महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया गया है। डॉ. सिंह ने बताया कि संतान की मृत्यु की स्थिति में 60 दिन के विशेष मातृत्व अवकाश, बाल देखभाल अवकाश, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच के दौरान 90 दिन तक के अवकाश सहित कई सुविधाओं का विस्तार किया गया है। दिव्यांग महिला अधिकारियों और दिव्यांग बच्चों वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सहायता एवं शिक्षा संबंधी सुविधाओं में वृद्धि की गई है।
रोजगार मेलों से 12 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र
डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रोजगार मेलों के माध्यम से 12 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। मसूरी में आयोजित कॉमन फाउंडेशन कोर्स के माध्यम से विभिन्न अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को साथ प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि वे अलग-अलग विभागों के बजाय एकीकृत सरकारी व्यवस्था के रूप में काम करें।
उन्होंने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट, यूपीएससी के एकीकृत पंजीकरण और सरकारी सेवाओं में ओबीसी प्रतिनिधित्व में वृद्धि को भी प्रशासनिक सुधारों का हिस्सा बताया। उनके अनुसार 2014 से सरकारी सेवा में ओबीसी प्रतिनिधित्व 19 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत हुआ है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ब्रिटिश शासन से मिला प्रशासनिक ‘स्टील फ्रेम’ रातोंरात समाप्त नहीं किया जा सकता और न ही संस्थागत स्मृति को पूरी तरह खत्म करना उचित है। आवश्यकता इस बात की है कि इसे समय के अनुरूप पुनर्गठित किया जाए, ताकि प्रशासन संविधान की उस भावना के अनुरूप काम करे, जिसमें सरकार का उद्देश्य शासन करना नहीं, जनता की सेवा करना और उसके प्रति जवाबदेह रहना है।
लेखक: डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री।

















