उत्तराखण्ड
डकैती के खुलासे के बाद जुए के अड्डों पर भी उठे सवाल, पुलिस जांच का दायरा बढ़ाने की मांग

हल्द्वानी के गोरापड़ाव में हथियारबंद बदमाशों द्वारा लाखों रुपये की डकैती के मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि आरोपियों को गोरापड़ाव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जुआ खेले जाने की जानकारी मिली थी और इसी कथित जुआ नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए डकैती की योजना बनाई गई।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि क्षेत्र में लंबे समय से बड़े स्तर पर जुआ चल रहा था, तो इसकी भनक स्थानीय पुलिस और संबंधित खुफिया तंत्र को क्यों नहीं लगी? लाखों रुपये के दांव वाले जुए के लिए धन, खिलाड़ियों और संचालकों का नेटवर्क बिना किसी स्थानीय संरक्षण या सहयोग के लंबे समय तक चलना भी जांच का विषय है।
डकैती के मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ पुलिस को यह भी पता लगाना चाहिए कि गोरापड़ाव और आसपास के क्षेत्रों में जुए के इन कथित अड्डों का संचालन कौन कर रहा था, वहां आने वाले लोगों का नेटवर्क क्या है और इस पूरे खेल में किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
यदि पुलिस इस दिशा में गहराई से जांच करती है तो जुए के नेटवर्क से जुड़े कई प्रभावशाली और आर्थिक रूप से संपन्न लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम या भूमिका जांच में ठोस साक्ष्य सामने आने के बाद ही सार्वजनिक की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि क्षेत्र में लंबे समय से जुए का कारोबार चल रहा था, तो केवल डकैती के आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी। पुलिस को डकैती के पीछे के पूरे नेटवर्क, जुए के अड्डों के संचालकों, धन के स्रोत और संभावित संरक्षण देने वालों तक पहुंचना होगा।
ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस डकैती की घटना के खुलासे के बाद जांच को केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित रखती है या गोरापड़ाव में लंबे समय से सक्रिय बताए जा रहे जुए के नेटवर्क की भी तह तक पहुंचती है। लेकिन नैनीताल पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टी सी ने कुछ घंटों में इसका पर्दाफाश कर दिया है,

















