उत्तराखण्ड
राजधानी में प्रशासनिक सर्जरी: सविन बंसल को सचिव नियोजन का जिम्मा, ‘एक्शन मोड’ वाले IAS आशीष चौहान बने देहरादून के नए जिलाधिकारी
अजय सिंह – वरिष्ठ संवाददाता


फाइलों से ज्यादा फील्ड पर भरोसा: कौन हैं आशीष चौहान?
2012 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. आशीष चौहान मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। इतिहास विषय में पीएचडी करने वाले डॉ. चौहान की गिनती उत्तराखंड के उन चुनिंदा अफसरों में होती है जो दफ्तरों के बंद कमरों के बजाय सीधे जनता के बीच जाकर संवाद करने में यकीन रखते हैं।
सराहनीय ट्रैक रिकॉर्ड: इससे पहले वे पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और पौड़ी जैसे भौगोलिक रूप से कठिन और संवेदनशील जिलों के डीएम रह चुके हैं।
रातों-रात चौपाल: पौड़ी में तैनाती के दौरान वे अक्सर देर रात सुदूर गांवों का रुख करते थे ताकि ग्रामीणों की जमीनी दिक्कतों को खुद महसूस कर उनका समाधान कर सकें। इसी वजह से जनता के बीच उनकी पहचान ‘फील्ड वाले अफसर’ के तौर पर बनी।
विविध अनुभव: वर्ष 2025 में पौड़ी से ट्रांसफर के बाद उन्होंने उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के सीईओ, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के निदेशक और परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक (MD) जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं भी निभाई हैं।
आपदा प्रबंधन और त्वरित फैसलों में महारत
सीमांत जिलों का लंबा अनुभव होने के कारण आशीष चौहान को संकट प्रबंधन (Crisis Management) का विशेषज्ञ माना जाता है। उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में उन्होंने आपदा राहत, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के मोर्चे पर फ्रंटफुट पर आकर काम किया। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे कागजी समीक्षा बैठकों के बजाय खुद मौके पर जाकर रियलिटी चेक करते हैं, जिससे प्रशासनिक काम-काज में लेती-लतीफी की गुंजाइश नहीं बचती।
देहरादून की ‘अग्निपरीक्षा’: नए DM के सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां
एक मैदानी और तेजी से फैलते महानगर के रूप में देहरादून की समस्याएं पहाड़ों से बिल्कुल अलग हैं। नए जिलाधिकारी के तौर पर आशीष चौहान के सामने चुनौतियों का एक लंबा पुलिंदा तैयार है:
यातायात और अतिक्रमण: शहर को रोज परेशान करने वाले ट्रैफिक जाम, सड़कों पर अवैध कब्जे और अंधाधुंध अवैध प्लाटिंग पर लगाम लगाना।
शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर: जलभराव की पुरानी समस्या से निजात दिलाना और कछुआ गति से चल रहे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करवाना।
कानून-व्यवस्था और जन-आक्रोश: हाल के दिनों में भू-कानून, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और प्रशासनिक शिथिलता को लेकर विपक्ष और जनता लगातार मुखर रही है। ऐसे में सरकार के प्रति जनता का भरोसा बहाल करना उनकी प्राथमिकता होगी।
इस बदलाव के क्या हैं सियासी और प्रशासनिक मायने?
देहरादून में आईएएस आशीष चौहान की एंट्री इस बात का साफ संकेत है कि सरकार अब राजधानी में “ग्राउंड मॉनिटरिंग मॉडल” लागू करना चाहती है। चूंकि दून की कानून-व्यवस्था और विकास सीधे तौर पर सरकार की छवि तय करते हैं, इसलिए एक ऐसे अधिकारी को कमान सौंपी गई है जो त्वरित निर्णय (Quick Decision Making) के लिए जाना जाता है। आने वाले दिनों में देहरादून के प्रशासनिक ढर्रे में कई बड़े और कड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
