उत्तराखण्ड
एमएसीटी समेत लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर हाईकोर्ट में मंथन, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति (HCLSC) की ओर से मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) समेत अन्य लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर बुधवार को उच्च न्यायालय परिसर में महत्वपूर्ण पूर्व-बैठक आयोजित की गई। बैठक में लंबित मामलों को आपसी समझौते के माध्यम से निस्तारित करने और वादकारियों को जल्द मुआवजा उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने की। इसमें विभिन्न बीमा कंपनियों के राज्य प्रमुख और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य उच्च न्यायालय में लंबित एमएसीटी मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तेज बनाना रहा।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि आपसी सहमति और सुलह के जरिए अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण किया जाए, ताकि लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे वादकारियों को राहत मिल सके। बीमा कंपनियों और संबंधित संस्थाओं से भी वादकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर समझौते के माध्यम से मामलों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया।
*अन्य मामलों में भी समझौते की संभावनाएं तलाशने पर जोर*
उत्तराखंड उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति की सचिव नेहा कुशवाहा ने प्रदेश के वादकारियों से अपील की है कि वे उच्च न्यायालय में लंबित अपने एमएसीटी मामलों के साथ-साथ ऐसे अन्य मामलों की भी पहचान करें, जिनका कानून के अनुसार आपसी समझौते से निस्तारण संभव है।
उन्होंने विशेष रूप से दीवानी मामलों, शमनीय आपराधिक मामलों, पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद, श्रम एवं रोजगार संबंधी मामले तथा बैंक रिकवरी से जुड़े मामलों में लोक अदालत के माध्यम से समाधान का विकल्प अपनाने की अपील की।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लंबित मुकदमों का बोझ कम करना और लोगों को सुलभ, त्वरित एवं किफायती न्याय उपलब्ध कराना है। लोक अदालत में पक्षकारों की आपसी सहमति से मामलों का निस्तारण किया जाता है।
*पुराने मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश*
बैठक के दौरान न्यायमूर्तिगण ने संबंधित पक्षों को केवल एमएसीटी मामलों तक सीमित न रहते हुए अन्य समझौता योग्य लंबित मामलों में भी समाधान की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए। विशेष रूप से पुराने लंबित मामलों की पहचान कर उनके शीघ्र निस्तारण के लिए सकारात्मक प्रयास करने पर जोर दिया गया।
समिति ने कहा कि आपसी सहमति और समन्वय के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जाना चाहिए। इसके लिए बीमा कंपनियों समेत सभी संबंधित संस्थाओं को अपनी सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है।
राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निस्तारण से पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया और बार-बार की तारीखों से राहत मिल सकती है। साथ ही, आपसी सहमति से विवाद समाप्त होने के कारण भविष्य में विवाद की संभावना भी कम होती है और नियमानुसार कोर्ट फीस की वापसी का लाभ भी मिल सकता है।
समिति ने प्रदेश के वादकारियों और सभी संबंधित पक्षों से आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा समझौते योग्य मामलों के त्वरित निस्तारण में सहयोग करने की अपील की है।



