उत्तराखण्ड
हल्द्वानी के सदर बाजार और मीरा मार्ग में सरकारी सड़क पर कब्जे का खेल! आखिर किसकी शह पर हो रही वसूली?

त्योहारी सीजन में दुकानों के बाहर सड़कों पर सज रहीं अस्थायी दुकानें, पैदल चलना भी मुश्किल; नगर निगम और प्रशासन की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
हल्द्वानी। शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र सदर बाजार और मीरा मार्ग की वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यहां यातायात व्यवस्था और अतिक्रमण नियंत्रण को लेकर प्रशासनिक निगरानी प्रभावी नहीं रह गई है। सरकारी सड़कों पर अस्थायी दुकानों और ठेलों का बढ़ता दबाव आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। हालात ऐसे हैं कि बाजार में दो लोगों का एक साथ निकलना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, त्योहारी सीजन में बाहरी क्षेत्रों से कई लोग अपना सामान बेचने के लिए हल्द्वानी पहुंचते हैं। लेकिन बाजार में उन्हें दुकान लगाने के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध नहीं हो पाता। आरोप है कि ऐसे कुछ दुकानदार अपनी दुकानों के बाहर नगर निगम की सरकारी सड़क पर अस्थायी दुकानें लगवाते हैं और इसके एवज में मोटी रकम वसूलते हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक व्यक्ति ने बताया कि सड़क सरकारी है, लेकिन उस पर दुकान लगाने की जगह उपलब्ध कराने के नाम पर कथित तौर पर निजी स्तर पर पैसे का लेन-देन होता है।
यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह गंभीर जांच का विषय है कि आखिर सरकारी सड़क पर दुकान लगाने की अनुमति देने का अधिकार किसके पास है? क्या नगर निगम की ओर से इसके लिए कोई शुल्क निर्धारित किया गया है या फिर सरकारी सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल निजी कमाई का जरिया बनाया जा रहा है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों को देना चाहिए।
बाजार में भीड़ के बीच सुरक्षा का सवाल
सदर बाजार और मीरा मार्ग में बढ़ती भीड़ और संकरे रास्तों के कारण आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। ऐसी परिस्थितियों में जेबकतरे और असामाजिक तत्व भीड़ का फायदा उठा सकते हैं। कई बार लोगों को यह तक पता नहीं चल पाता कि भीड़ के बीच कब उनकी जेब से सामान या नकदी निकाल ली गई। इसके अलावा किसी आपात स्थिति में पुलिस, एंबुलेंस या अग्निशमन वाहन का बाजार तक पहुंचना भी बड़ी चुनौती बन सकता है।
व्यापार मंडल के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर?
व्यापार मंडल की ओर से समय-समय पर बाजार की व्यवस्था, व्यापारियों की समस्याओं और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन सवाल यह है कि बाजार की इस जमीनी स्थिति पर प्रभावी पहल कौन करेगा? क्या व्यापार मंडल, नगर निगम, पुलिस और जिला प्रशासन मिलकर इस समस्या का समाधान निकालेंगे या फिर आम जनता इसी तरह परेशान होती रहेगी?
किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। यदि बाजार में भगदड़, आग लगने, किसी महिला के साथ छेड़छाड़, चोरी या अन्य कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या संबंधित विभाग किसी बड़ी घटना के बाद ही जागेंगे?
नगर निगम और जिला प्रशासन को सदर बाजार एवं मीरा मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर सरकारी सड़कों से अतिक्रमण हटाने, अस्थायी दुकानों के लिए निर्धारित स्थान तय करने और बाजार में पैदल आवागमन के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। साथ ही, सरकारी सड़क पर दुकान लगाने के नाम पर कथित वसूली की शिकायतों की निष्पक्ष जांच भी होनी चाहिए।
आखिर सरकारी सड़क जनता की सुविधा के लिए है या कुछ लोगों की कमाई का माध्यम बनती जा रही है? इस सवाल का जवाब हल्द्वानी की जनता संबंधित अधिकारियों से चाहती है।





