उत्तराखण्ड
दीपावली पर लेखक बी.पी.एस. वालिया से आत्मीय मुलाकात, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों की लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने की सराहना


दीपावली के पावन अवसर पर लेखक श्री बी.पी.एस. वालिया ने लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से उनके आवास पर आत्मीय भेंट कर दीपावली की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने श्री वालिया से पुनः मुलाकात पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके द्वारा धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
मुलाकात के दौरान अफ्रीकी देशों में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और विरासत को संकलित करने के श्री वालिया के महत्वपूर्ण प्रयासों पर चर्चा हुई। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि विदेशों में स्थित गुरुद्वारों के इतिहास को संजोना केवल ऐतिहासिक दस्तावेज तैयार करना नहीं है, बल्कि यह सिख धर्म की गौरवशाली परंपराओं, गुरु साहिबान की शिक्षाओं और वैश्विक स्तर पर सिख समुदाय के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास है।
उन्होंने उत्तराखंड में श्री वालिया द्वारा संचालित एक अन्य महत्वपूर्ण परियोजना की भी प्रशंसा की। इस परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के ऐतिहासिक गुरुद्वारों एवं प्रमुख धार्मिक स्थलों के इतिहास, परंपराओं, धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि उत्तराखंड की धरती आध्यात्मिक चेतना, धार्मिक आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की प्रतीक रही है। यहां के ऐतिहासिक गुरुद्वारों और धार्मिक स्थलों से जुड़ी स्मृतियों, परंपराओं एवं इतिहास को संरक्षित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इस प्रकार के प्रयास हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों, संस्कृति और गौरवशाली विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं।उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से होती है। विरासत का संरक्षण केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए अपनी पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों को सुरक्षित रखना भी है।
इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने श्री बी.पी.एस. वालिया को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुखी एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनके शोध एवं दस्तावेजीकरण के प्रयास उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।,





