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उत्तराखण्ड

शिक्षा के मंदिरों को सांप्रदायिक विवादों से दूर रखना समय की मांग, मरियम पैरामेडिकल कॉलेज प्रकरण में निष्पक्ष जांच की उठी मांग

 

हल्द्वानी

हल्द्वानी 25 जुलाई। कमलुवागांजा स्थित मरियम पैरामेडिकल कॉलेज में 25 जुलाई को हुए विवाद के बाद यह मामला केवल एक शैक्षणिक संस्थान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा संस्थानों की गरिमा, कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का भी विषय बन गया है। कॉलेज की प्रधानाचार्य श्रीमती दया पांडे ने उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन को प्रार्थना-पत्र देकर आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने जबरन कॉलेज परिसर में प्रवेश कर शिक्षण कार्य में बाधा पहुंचाई, अभद्र व्यवहार किया, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी।

प्रधानाचार्य ने अपने शिकायत पत्र में कहा है कि पिछले तीन वर्षों से कॉलेज का संचालन व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है। इस अवधि में विश्वविद्यालय से संबंधित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं, संस्थान की वित्तीय देनदारियों का भुगतान किया गया तथा एक बैच सफलतापूर्वक शिक्षा पूर्ण कर चुका है। उनके अनुसार संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य किया गया है।

शिकायत के अनुसार 25 जुलाई को कुछ पूर्व सोसायटी सदस्य और उनके साथ आए लगभग 30 से 35 लोग कॉलेज परिसर में जबरन प्रवेश कर गए। आरोप है कि उन्होंने शिक्षण कार्य बाधित किया, स्टाफ के साथ अभद्रता की, गाली-गलौज और धमकी दी। प्रधानाचार्य का कहना है कि संबंधित व्यक्तियों का वर्तमान में संस्थान या सोसायटी के किसी वैध दस्तावेज में कोई अधिकार नहीं है, फिर भी उन्होंने कॉलेज के कार्यों में हस्तक्षेप किया।

घटना की सूचना तत्काल डायल-112 पर दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। शिकायत में कहा गया है कि पुलिस ने संबंधित लोगों को भविष्य में हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद दोबारा कॉलेज पहुंचकर प्रधानाचार्य और कर्मचारियों को कथित रूप से जान से मारने की धमकी दी गई।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिक्षाविदों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर विवादों का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत का संविधान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की अवधारणा को मजबूत करता है, जहां प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्राप्त हैं और किसी भी विवाद का समाधान केवल कानून और साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी मामले में आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन किसी भी पक्ष या समुदाय को बिना न्यायिक प्रक्रिया के दोषी ठहराना या पूरे प्रकरण को सांप्रदायिक रंग देना सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। शिक्षा संस्थानों का वातावरण विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण का केंद्र होता है, इसलिए वहां शांति, सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना प्रशासन, प्रबंधन और समाज सभी की साझा जिम्मेदारी है।

प्रधानाचार्य श्रीमती दया पांडे ने प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई करने तथा कॉलेज परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने घटना से संबंधित वीडियो, फोटो और अन्य साक्ष्य भी प्रशासन को उपलब्ध कराने की बात कही है।

फिलहाल इस मामले में शिकायत के आधार पर प्रशासन और पुलिस से कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। साथ ही यह भी आवश्यक माना जा रहा है कि मामले में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाए, जिससे कानून का राज कायम रहे और समाज में धार्मिक सौहार्द तथा शिक्षा संस्थानों की गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।

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