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उत्तराखण्ड

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक महिला दिवस के बुद्ध पार्क, में सभा अयोजित की गई,,

 प्रगतिशील महिला एकता केंद्र (प्रमएके) के नेतृत्व में 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक महिला दिवस के साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत बुद्ध पार्क, तिकोनिया में एक सभा की गई। इस कार्यक्रम में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) और क्रांतिकारी लोक संगठन (क्रालोस) के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

इस दौरान संचालन करते हुये प्रमएके की आरती ने कहां कि 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस मेहनतकश महिलाओं के अधिकारों के संघर्षों का प्रतीक दिवस है। यह दिवस मज़दूर-मेहनतकश, समाजवादी महिलाओं ने लड़कर संघर्षों के बाद हासिल किया है। आज पूँजीवादी व्यवस्था भी महिला दिवस मना रहा है। वह इस दिवस में महिलाओं को एक दिन गिफ्ट देना, होटलों में भोजन कराना जैसे आयोजन कर उनको उनके संघर्षों के इतिहास से काटकर आभासी मुक्ति की बात कर रहा हैं। ताकि महिलाएं अपने हक-अधिकारों के लिए आगे नहीं आ सकें। हम मेहनतकश लोगों को सचेत होकर पूंजीवादी व्यवस्था के इस चरित्र को खोल कर सामने रखना होगा।

प्रमएके की महासचिव रजनी ने कहाँ कि आज के समाज में महिलाओं के साथ में छेड़खानी, बलात्कार, महिला हिंसा जैसी चीजें बढ़ती जा रही हैं। इनके कारणों में समाज में मौजूद पितृसत्तात्मक मूल्य मान्यताएं एवं पतित उपभोक्तावादी अश्लील संस्कृति है। महिला हिंसा के इन कारणों को यह पूंजीवादी व्यवस्था अपने मुनाफे के चरित्र के कारण बना कर रखती है। ताकि इससे महिलाओं को दुहरे शोषण का शिकार बनाया जा सके।

पछास के महासचिव महेश ने कहा कि पूरी दुनिया भर के अंदर महिला अधिकारों के संघर्षों व उनके सामाजिक संघर्षों का लंबा इतिहास है। भारत के अंदर भी आजादी के आंदोलन में दुर्गा भाभी, प्रीति लता सरीखी महिलाओं ने अपने संघर्षों से सामने रखा। उत्तराखंड में महिलाओं ने चिपको आंदोलन से लेकर, नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन, उत्तराखंड राज्य बनाने के आंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी की।आज ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ जैसे खोखले नारे उछाले जा रहे हैं। समाज में मजदूर-मेहनतकश घरों से आने वाली छात्राओं को पढ़ने लिखने व अपनी आजादी से जीने का अधिकार नहीं है। महिला हिंसाओं, भ्रूण हत्या जैसी चीजों ने समय-समय पर ऐसे नारों के खोखलेपन को उजागर किया है। बढ़ती बेरोजगारी की भयावता को आज हर कोई समाज में महसूस कर रहा है। इसके विरुद्ध हमें संघर्ष कर आगे बढ़ने की जरूरत है।

क्रालोस के टीकाराम पांडे ने कहा कि आज केंद्र सरकार हिंदुत्व के ऐजेंडे को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में जनता के अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। आज समाज के सभी वर्ग महिलाएं, छात्र-नौजवान, मजदूर-मेहनतकश, किसान सभी वर्ग परेशान है। ऐसे में हम सब को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आगे आना चाहिए।

कार्यक्रम में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, जायडस कंपनी के वक्ताओं ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम में ‘8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर महिला दिवस जिंदाबाद, महिलाओं को मुक्ति कहां मिलेगी-समाजवाद में मज़दूर राज में, महिला हिंसा पर रोक लगाओ, उपभोक्तावादी अश्लील संस्कृति मुर्दाबाद, पुरुष प्रधान मानसिकता मुर्दाबाद’ आदि नारे लगाए गए।

कार्यक्रम में रजनी, आरती, हेमा, दीपा, भगवती, हेमा, चंपा गिनवाल, सरिता, कृष्णा, मनीषा, भावना महेश, टीकाराम, उमेश, चंदन, विनोद, रियासत, रईस सहित दर्जनों लोग शामिल थे।

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