उत्तराखण्ड
हमारा कचरा, हमारी जिम्मेदारी
पवनीत सिंह बिंद्रा
,,हम सब अपना घर साफ रखते हैं, पर कचरा अक्सर हमारे घर तक ही सीमित नहीं रहता। कई बार हम या दुकानदार रात में कूड़ा सड़क, खाली प्लॉट या नालियों में फेंक देते हैं — और सोचते हैं “बस मेरा घर तो साफ है।” पर यह कचरा बीमारियाँ फैलाता है, मच्छर-कीड़े खड़े करता है, गंदगी फैला कर हमारे और हमारे बच्चों की सेहत को खतरे में डालता है।
हम क्या कर सकते हैं
कचरा हमेशा बंद डिब्बे, बैग या पेटी में रखें; खुले में न फेंकें.
दुकान बंद करते समय कचरा एक बंद कट्टे/कंटेनर में रखें ताकि पर्यावरण मित्र उठा सकें.
रिसायक्लेबल कचरे (कागज़, प्लास्टिक, कांच) अलग रखें; ऑर्गेनिक कचरा कम्पोस्ट करें अगर संभव हो.
नियमित रूप से कूड़ादान को कचरा-गाड़ी को सौंपें; कूड़ा सड़क पर न डालें.
मोहल्ले में खाली प्लॉट पर कचरा फेंकने से मनाही करें; यदि जगह गन्दी है तो सामूहिक सफाई की पहल करें.
पर्यावरण मित्रों का सम्मान
हमारे पर्यावरण मित्र हमारे उठने से पहले ही सुबह-शाम गली-मोहल्ले साफ करते हैं। उनका काम आसान करें — कचरा बंद रखें, अलग रखें, ताकि वे सुरक्षित और कुशलता से काम कर सकें। उन्हें दोष देने के बजाय उनका आभार व्यक्त करें। कि उनकी वजह से हम और हमारा जीवन सुरक्षित है, लेकिन इस पर नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी होनी चाहिए ,जिस तरह से घर साफ रखते हैं और हमे शहर को साफ रखने का संकल्प लेना चाहिए सिर्फ एक राजनीतिक बयान किया ओर पूरे साल कोई अमल नहीं एवं समाचार पत्र में बड़े बड़े अक्षर से साफ की सफाई का ढिंढोरा ,
आप क्या करें,,कचरा न फेंकना केवल नियम नहीं, हमारी नैतिक जिम्मेदारी है — हमारी और हमारी आने वाली पीढ़ियों की सेहत के लिए। अगर हर व्यक्ति थोड़ी सी भी जागरूकता दिखाए तो हमारा शहर साफ-सुथरा और स्वस्थ रहेगा।
एक छोटा सा संदेश
“कचरा आपके हाथ में, स्वच्छता आपकी ज़िम्मेदारी। बंद बैग में रखें, खुले में न फेंके — शहर रहेगा साफ,हम और हमारे
बच्चे होंगे स्वस्थ।”

