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उत्तराखण्ड

घोड़ाखाल एनसीसी कैंप में अंतरराष्ट्रीय मैराथन धावक सुरेश चन्द्र पाण्डे ने कैडेटों को किया प्रेरित

 

द्वारा घोड़ाखाल में आयोजित संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (CATC) के अंतर्गत बुधवार को प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय मैराथन धावक, पूर्व सैनिक, खेल प्रशासक एवं प्रशिक्षक सूबेदार मेजर सुरेश चन्द्र पाण्डे (सेवानिवृत्त) ने कैडेटों को प्रेरणादायी अतिथि व्याख्यान दिया। उनके जीवन संघर्ष, अनुशासन, खेल उपलब्धियों और राष्ट्रसेवा से जुड़े अनुभवों ने कैडेटों को विशेष रूप से प्रेरित किया।

अल्मोड़ा जनपद में 7 अगस्त 1963 को जन्मे सुरेश चन्द्र पाण्डे वर्ष 1981 में कुमाऊँ रेजीमेंट में भर्ती हुए। अपनी मेहनत, लगन और अनुशासन के बल पर उन्होंने सेना और खेल जगत में विशिष्ट पहचान स्थापित की। व्याख्यान के दौरान उन्होंने कैडेटों को अनुशासन, दृढ़ संकल्प, नियमित अभ्यास, शारीरिक फिटनेस और राष्ट्रभक्ति के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि जीवन और खेल दोनों में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। कठिन परिश्रम, समय का सदुपयोग, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचाती है। उन्होंने कैडेटों को चुनौतियों का डटकर सामना करने और निरंतर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलाई पहचान

सुरेश चन्द्र पाण्डे ने अपने खेल जीवन में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की अनेक प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। उनकी प्रमुख उपलब्धियों में वर्ष 1985 में जबलपुर में आयोजित राष्ट्रीय क्रॉस कंट्री चैम्पियनशिप तथा नई दिल्ली राष्ट्रीय ओपन मैराथन में स्वर्ण पदक, वर्ष 1986 में राष्ट्रीय क्रॉस कंट्री एवं ओपन मैराथन प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक शामिल हैं।

उन्होंने आईएएएफ विश्व क्रॉस कंट्री चैम्पियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया तथा केन्या, जापान, मलेशिया और सिंगापुर सहित कई देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन किया। वर्ष 1996 में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय क्रॉस कंट्री चैम्पियनशिप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

खिलाड़ियों के निर्माण में भी निभाई अहम भूमिका

व्याख्यान के दौरान उन्होंने बताया कि खेल उपलब्धियों के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा और प्रशिक्षण को भी समान महत्व दिया। वर्षों तक खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर उन्होंने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट तैयार किए। 60 वर्ष से अधिक आयु होने के बावजूद वे आज भी प्रतिदिन नियमित अभ्यास करते हैं और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

उन्होंने खेल प्रशासन में अपने योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि जिला क्रीड़ा अधिकारी से लेकर उत्तराखण्ड खेल विभाग के वरिष्ठ पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने तथा प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें लक्ष्मण पुरस्कार और मुख्यमंत्री खेल पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

कैडेटों ने पूछे करियर और नेतृत्व से जुड़े प्रश्न

कार्यक्रम के अंत में आयोजित संवाद सत्र में कैडेटों ने खेल, करियर, नेतृत्व क्षमता, सेना जीवन और आत्मअनुशासन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। सुरेश चन्द्र पाण्डे ने अपने अनुभवों के आधार पर सभी प्रश्नों के विस्तृत उत्तर दिए। यह सत्र कैडेटों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा और उनमें नेतृत्व, अनुशासन तथा राष्ट्रसेवा की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम के समापन पर एनसीसी अधिकारियों, एएनओ, पीआई स्टाफ तथा कैडेटों ने सुरेश चन्द्र पाण्डे का आभार व्यक्त करते हुए उनके प्रेरणादायी विचारों को युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

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