उत्तराखण्ड
तृतीय दिवस के सत्रों में शोध पद्धति, डिजिटल टूल्स और साहित्य पुनर्वलोकन पर हुआ मार्गदर्शन

कार्यशाला का आयोजन पत्रकारिता एवं मीडिया अध्ययन विद्याशाखा के निदेशक प्रो. राकेश चन्द्र रयाल के निर्देशन में किया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध कार्य में गंभीरता, अनुशासन एवं मौलिकता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
विशेषज्ञ वक्ताओं ने दिए महत्वपूर्ण व्याख्यान
तृतीय दिवस के प्रथम सत्र में विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की डॉ. सीता विशेषज्ञ वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। अपने व्याख्यान में उन्होंने शोध में रुचि के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि शोध कार्य में विषय के प्रति जिज्ञासा एवं लगन अत्यंत आवश्यक है।
इसके बाद कंप्यूटर विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष भट्ट ने शोध कार्य में उभरती प्रौद्योगिकी [Emerging Technology] एवं डिजिटल रिसर्च टूल्स के प्रभावी उपयोग के संबंध में विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने आधुनिक शोध में तकनीकी साधनों की भूमिका को रेखांकित किया।
साहित्य पुनर्वलोकन पर विशेष जोर
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शंशाक शुक्ल ने साहित्य के पुनर्वलोकन तथा शोध में उसकी भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को विषय से संबंधित पूर्व अध्ययनों का गंभीरता से अध्ययन करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि शोध कार्य अधिक सशक्त और प्रामाणिक बन सके।
इस अवसर पर विभाग के सहायक प्राध्यापक विनायक तिवारी एवं हर्षिता मेहता भी उपस्थित रहे।

