उत्तराखण्ड
मुख्यमंत्री धामी की बड़ी पहल: हर ब्लॉक में बनेगा आदर्श कृषि एवं उद्यान गांव

क्षेत्रीय विशेषताओं पर आधारित वैज्ञानिक खेती की योजना
मुख्यमंत्री जी ने जोर दिया कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जलवायु, भूमि की गुणवत्ता और स्थानीय जरूरतों का वैज्ञानिक अध्ययन कर तय किया जाए कि किस क्षेत्र में कौन सी फसल या सब्जी बेहतर विकसित हो सकती है। उन्होंने मंडी परिषद को अगले तीन वर्षों की विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। खेती की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और आय वृद्धि सुनिश्चित करने पर ठोस प्रयासों का आह्वान किया गया।
प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग पर बल
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय समेत अन्य संस्थाओं के सहयोग से राज्य भर में बड़े स्तर पर कृषि गोष्ठियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए। इनके माध्यम से किसानों को उन्नत खेती तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियां, उच्च गुणवत्ता वाले बीज, पौधे और खाद उपलब्ध कराए जाएंगे। विशेष रूप से तिलहनी फसलों जैसे सरसों, तिल, सूरजमुखी और सोयाबीन के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया, ताकि विविधीकरण हो और आर्थिक लाभ सुनिश्चित हो।
जैविक खेती और नवाचारों का विस्तार
बैठक में जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा हुई। शोध और तकनीकी नवाचारों को सीधे किसानों तक पहुंचाने के लिए ‘लैब टू लैंड’ कार्यक्रम का विस्तार करने के निर्देश दिए। बायोगैस संयंत्र और सौर ऊर्जा संचालित पंपों के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया। मुख्यमंत्री जी ने किसानों को उनकी उपज के विपणन में हर संभव सहयोग देने और डिजिटल माध्यम से बिक्री के लिए प्रशिक्षण व सुविधाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया।
यह पहल उत्तराखंड को कृषि और बागवानी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में धामी सरकार का बड़ा कदम है, जो स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय करेगी।
