उत्तराखण्ड
संत निरंकारी मिशन: बाबा हरदेव सिंह जी को श्रद्धांजलि समागम
हर हृदय के देव बाबा हरदेव सिंह जी को अर्पित श्रद्धा सुमन
मानव जीवन का हर क्षण इंसानियत और भक्ति में समर्पित हो
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

सतगुरु माता सुदीक्षा जी के आशीर्वचन
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों में फरमाया कि बाबा जी का सम्पूर्ण जीवन मानवता, सेवा और प्रेम भक्ति का प्रेरक उदाहरण रहा। उन्होंने प्रेरित किया कि मानव जीवन का प्रत्येक क्षण सार्थक हो, इंसानियत, करुणा एवं मानवीय मूल्यों का प्रमाण प्रस्तुत करे। बाबा जी की शिक्षा है कि व्यक्ति अपने भीतर मानवीय गुण विकसित कर निराकार का आसरा लेते हुए उद्देश्यपूर्ण जीवन जिए।
यदि जीवन में दुख-पीड़ा हो, तो उसे बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदनशीलता एवं सहयोग से शांत करना हमारा कर्तव्य है। जीवन रिश्तों में प्रेम एवं समर्पण की भावना को मजबूत करे—यही बाबा जी की शिक्षाओं का सार है।
ब्रह्मज्ञान प्राप्ति के बाद जीवन व्यक्तिगत सीमाओं से ऊपर उठकर समस्त मानवता की सेवा का माध्यम बन जाता है। सच्ची सेवा निस्वार्थ, विनम्र एवं प्रेमपूर्ण होती है, जबकि भक्ति व्यवहार, विचार एवं कर्मों में झलकती है।
अमर संत अवनीत जी का समर्पित जीवन
अमर संत अवनीत जी के समर्पित जीवन का उल्लेख करते हुए सतगुरु माता जी ने कहा कि सच्चा समर्पण व्यवहार एवं प्राथमिकताओं में दिखे। गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों के बीच संगत, सेवा एवं भक्ति को सर्वोपरि रखकर पूर्ण निष्ठा से जीवन जिया जा सकता है।
हल्द्वानी सतसंग भवन में समर्पण दिवस
समर्पण दिवस पर हल्द्वानी के संत निरंकारी सतसंग भवन (गौजाजाली, बरेली रोड) में सतसंग हुआ। श्रद्धालुओं ने बाबा हरदेव सिंह जी की याद में गीतकारों, कवियों एवं विचारकों की रचनाओं से हृदय की अनुभूतियां व्यक्त कीं। हर शब्द एवं स्वर आत्मा को छू गया—कुछ ने दिव्य शिक्षाओं का संदेश दिया, तो कुछ ने सेवा-समर्पण एवं मानव कल्याण के कार्यों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
बाबा हरदेव सिंह जी की प्रेरणा आज भी जीवित है। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज उनके संदेशों को आगे बढ़ाते हुए सेवा, समर्पण एवं सद्भाव का प्रकाश फैला रही हैं, जिससे विश्व में मानवता, एकता एवं भाईचारे का संदेश गूंज रहा है।
