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उत्तराखण्ड

शिवालिक जंगलों में गुरबाणी की धुनें: सिख समाज ने वन रक्षा का आध्यात्मिक संदेश दिया

पवनीत सिंह बिंद्रा

नैनीताल हल्द्वानी 

हिमालय की पावन वादियों में आज गुरबाणी की मधुर धुनें गूंजीं, जो वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा का प्रेरणादायी संदेश लेकर आईं। सिख समाज ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की वाणी को आधार बनाकर एक अनुपम कीर्तन आयोजन किया, जिसमें प्रकृति को गुरु, पिता और माता के रूप में पूजने का आह्वान किया गया। यह कार्यक्रम हाल के गुलदार हमलों में मृतकों को श्रद्धांजलि भी था, जो पर्यावरण असंतुलन की चेतावनी देता है।

गुरबाणी का आधार: प्रकृति ही सृष्टि का मूल

आयोजन की आत्मा थी गुरु नानक देव जी की अमर वाणी “पवन गुरु पानी पिता माता धरति महतु” (जपुजी साहिब)—जिसका अर्थ है वायु हमारे गुरु, जल पिता, धरती माता हैं। सरदार जगजीत सिंह आनंद ने व्याख्या की, “यह श्लोक हमें सिखाता है कि प्रकृति के पांच तत्वों (पवन, जल, धरती, अग्नि, आकाश) का सम्मान ही सच्ची भक्ति है। वनों की कटाई से हम इन तत्वों को आहत कर रहे हैं, जिसका फल ग्लोबल वार्मिंग और वन्यजीव संघर्ष के रूप में मिल रहा है।”

कार्यक्रम में अन्य शबद भी गाए गए, जैसे “हरि मंडर मझारा वन”—जो जंगल को हरि का मंदिर बताता है। कीर्तनकारों ने बताया कि गुरबाणी प्रकृति संरक्षण की प्राचीन शिक्षा देती है: वृक्षों को काटना पाप है, जल संरक्षण धर्म। सुबह 10 बजे शुरू हुए तीन घंटे के कीर्तन में 200 से अधिक श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

संकट की पृष्ठभूमि: गुलदार हमले और जंगल संहार

शिवालिक छकाता रेंज में वनों का अंधाधुंध कटाव, वन अग्नि और प्लास्टिक प्रदूषण ने पारिस्थितिकी को चोट पहुंचाई है। पिछले 15 दिनों में गुलदारों के तीन घातक हमलों से क्षेत्र में दहशत है। मॉर्निंग ग्रुप के हरजीत सिंह चड्ढा ने गुरबाणी उद्धृत करते हुए कहा, “सबना जीअ क आका मुरारी”—सभी जीवों का स्वामी एक है, अतः वन्यजीवों से वैर न रखें। वरिष्ठ अधिवक्ता ललित कर्नाटक ने जोड़ा, “गुरु वाणी हमें सिखाती है कि मानव-प्रकृति संघर्ष समाप्त करने के लिए वनीकरण और कानून पालन जरूरी है।”

नेतृत्व और भागीदारी: आध्यात्मिक जागरण का संकल्प

सरदार जगजीत सिंह आनंद के नेतृत्व में अमनदीप सिंह टिंकू, महेंद्र सिंह सेठी, जसपाल सिंह ने आयोजन किया। समापन पर आनंद जी ने गुरबाणी से प्रेरित संकल्प दिलाया: “प्लास्टिक त्यागें, वृक्ष लगाएं, वन अग्नि रोकें।” उन्होंने “धरती माता की सेवा ही गुरु सेवा” का उद्घोष किया।

उपस्थितजनों में नैनीताल हाईकोर्ट के ललित कर्नाटक, बी.डी. पाण्डेय, जीत सिंह, नानक सिंह, , मनमोहन सिंह बिष्ट शामिल थे। वन विभाग प्रतिनिधि ने सराहना की और अगले वृक्षारोपण में सहयोग का वादा किया। आज हम पर्यावरण के लिए सजक नहीं है हम जब पर्वतीय क्षेत्रों में पिकनिक मनाने जाते हैं तो घर का सारा कूड़ा पाकनिक वाली जगह में छोड़ आते हैं,इसलिए हम मनोरंजन कर रहे हैं किसकी गोद में पर्यावरण की गोद में जब पर्यावरण ही शुद्ध नहीं तो किस तरह की उम्मीद रखते हैं आज 90 प्रतिशत व्यक्ति सिर्फ अपने लिए जी रहा उसे पर्यावरण संरक्षण से कोई मतलब नहीं है जिस तरह आज प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है उसके लिए हम जिम्मेदार है,आज ऋषियों ने इस देव भूमि को तप स्थान का दर्जा दिया है लिकिन वर्तमान समय में आज धार्मिक स्थल पिकनिक के लिए ही रह गए,गुरुनानक देव जी पवन गुरु पानी पिता माता धरत का दर्जा दिया कि वायु हमारे लिए गुरु समान है और पानी को पिता का दर्जा दिया एवं धरती को माता का आज धरती हमारी सांस्कृतिक से परे है हम उसको दूषित करने में लगे हुए हैं

यह गुरबाणी-आधारित पहल उत्तराखंड में पर्यावरण जागृति की नई लहर ला सकती है, जहां आध्यात्मिकता और विज्ञान का संगम हो।

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