उत्तराखण्ड
ब्रह्मज्ञान के पश्चात सत्संग आवश्यक है
पवनीत सिंह बिंद्रा

बाबा हरदेव सिंह जी महाराज ने अपनी हरदेव वाणी में फरमाया है:
“जिसकी भक्ति जिसकी पूजा, उसका ज्ञान जरूरी है।
कहे हरदेव, पहले ईश्वर की पहचान जरूरी है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्ञान पर दृढ़ता के लिए सत्संग आवश्यक है। बाबा अवतार सिंह जी महाराज कहते हैं, “जो संतजन प्रतिदिन संगत में आते हैं, वे कभी भुलावे में नहीं पड़ते। कोई भी समय हो, संगत को हाथ से नहीं खोने देते।”
नेपाल सिंह चौधरी जी ने आगे कहा कि आज ज्ञान की कमी के कारण संसार में मनुष्य एक-दूसरे के प्रति द्वेषभावना और अहंकार से ग्रस्त है। इसी भावना को मिटाने के लिए सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ब्रह्मज्ञान प्रदान कर रहे हैं। इस ज्ञान से ही संसार में भाईचारा और एकता स्थापित हो सकती है तथा प्रभु प्राप्ति संभव है।
सत्संग के अंत में क्षेत्रीय संचालक श्री दीपक वाही जी ने दिल्ली से पधारे महात्माओं और समस्त साधसंगत का आभार व्यक्त किया।





