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उत्तराखण्ड

राज्यपाल ने लोक भवन सुरक्षाकर्मियों को प्रदान किए विशेष बैज, विशिष्ट पहचान और मनोबल बढ़ाने वाली पहल

पवनीत सिंह बिंद्रा

देहरादून,

के लोक भवन में सुरक्षा की गरिमा को नई ऊंचाई प्रदान करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने आज सुरक्षाकर्मियों को विशेष बैज अलंकृत किए। यह पहल न केवल कार्मिकों को विशिष्ट पहचान देगी, बल्कि उनके मनोबल को मजबूत करने और कर्तव्य के प्रति समर्पण बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। बैज पर ऊपर ‘गवर्नर्स सिक्योरिटी’ और नीचे ‘उत्तराखण्ड पुलिस’ अंकित है, जो उनकी भूमिका और जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

राज्यपाल का महत्वपूर्ण संदेश: लोक भवन है संवैधानिक प्रतिष्ठा का प्रतीक

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा, “लोक भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि राज्य की संवैधानिक गरिमा और प्रशासनिक उत्तरदायित्व का जीवंत प्रतीक है। यहां तैनात प्रत्येक सुरक्षाकर्मी एक सजग संरक्षक है।” उन्होंने बैज को मात्र प्रतीक चिन्ह न बताते हुए इसे कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, सतर्कता और समर्पण के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करार दिया। राज्यपाल ने जोर दिया कि बैज धारण करना सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है, जो कार्मिकों को सदैव जागरूक रखेगा।

इस अवसर पर उन्होंने पुलिस विभाग, प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के समन्वित प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की। राज्यपाल के अनुसार, ऐसी पहलें राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाएंगी।

गृह एवं पुलिस विभाग की भूमिका, सचिव ने दी जानकारी

राज्यपाल सचिव श्री रविनाथ रामन ने बताया कि यह अभिनव पहल माननीय राज्यपाल की प्रेरणा से शुरू हुई। गृह विभाग और उत्तराखंड पुलिस के सहयोग से आवश्यक कार्यवाही पूरी कर बैज अलंकरण किया गया। उन्होंने कहा कि इससे सुरक्षाकर्मी अपने कर्तव्यों को और अधिक उत्साह के साथ निभाएंगे।

प्रमुख उपस्थितियां: प्रशासनिक एवं सुरक्षा अधिकारी सम्मिलित

कार्यक्रम में अपर सचिव राज्यपाल श्रीमती रीना जोशी, परिसहाय राज्यपाल  अमित श्रीवास्तव, मेजर सुमित कुमार शादिजा, वित्त नियंत्रक डॉ. तृप्ति श्रीवास्तव तथा लोक भवन के मुख्य सुरक्षा अधिकारी  पंकज कोठियाल उपस्थित रहे। यह समारोह लोक भवन परिसर में आयोजित हुआ, जहां सुरक्षाकर्मियों ने राज्यपाल का आभार जताया।

महत्व: सुरक्षा व्यवस्था में नई पहल का असर

यह पहल उत्तराखंड में सुरक्षा कार्मिकों के लिए एक मिसाल कायम करती है। राज्यपाल की इस पहल से न केवल लोक भवन की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अन्य सरकारी भवनों में भी समान प्रयासों को प्रोत्साहन मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलें मनोबल बढ़ाकर दक्षता में वृद्धि करती हैं।

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