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उत्तराखण्ड

करुणा, प्रेम और सह-अस्तित्व का सजीव उत्सव: मानव एकता दिवस

हल्द्वानी, 24 अप्रैल 2026: हृदय में करुणा, प्रेम और एकत्व की दिव्य चेतना जागृत होने पर मानव स्वार्थ से ऊपर उठकर सृष्टि कल्याण का माध्यम बन जाता है। “मानव को मानव हो प्यारा, एक-दूजे का बने सहारा” का यह संदेश आज हृदयों में जीवंत हो उठा।

विशाल सत्संग का आयोजन

बाबा गुरबचन सिंह जी की स्मृति में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के आशीर्वाद से संत निरंकारी सत्संग भवन, गौजाजाली, बरेली रोड, हल्द्वानी में विशाल सत्संग हुआ। हल्द्वानी ब्रांच प्रचारक महात्मा श्री गोविंद सिंह बिष्ट जी ने सत्संग को संबोधित करते हुए कहा कि युगदृष्टा बाबा गुरबचन सिंह जी ने सत्य बोध से समाज को अंधविश्वासों से मुक्त कर नशा मुक्ति, सादा विवाह और युवाओं को सकारात्मक सोच से जोड़ा। बाबा हरदेव सिंह जी ने “रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं” का अमर संदेश देकर रक्तदान को आध्यात्मिक सेवा का अभिन्न अंग बनाया। यह संदेश आज भी निरंकारी भक्तों के हृदय में प्रेरणा स्रोत है।

देशव्यापी रक्तदान शिविरों की सफलता

संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा ने बताया कि भारतभर के 200 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित हुए, जहां 40,000 यूनिट रक्त संकलित किया गया। वर्षभर में 705 स्थानों पर ऐसे शिविर होंगे। पिछले चार दशकों में 9,174 शिविरों से 15,00,230 यूनिट रक्त एकत्र हो चुका है, जो मिशन की मानव सेवा प्रतिबद्धता दर्शाता है।

सेवा और स्वच्छता का संदेश

आयोजन में स्वच्छता, सतर्कता और सेवा भाव का पालन हुआ। बाबा गुरबचन सिंह जी ने सत्य, सरलता और सद्भाव का मार्ग दिखाया, जबकि सतगुरु माता सुदीक्षा जी इसे आगे बढ़ा रही हैं। यह केवल आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और निष्काम सेवा का जीवंत स्वरूप है।

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