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उत्तराखण्ड

रैपिडो का निजी बाइक‑सेवा विवाद: हल्द्वानी में नियम‑छल या कानून की दुल्हन?

 

हल्द्वानी,

में ऑनलाइन बाइक‑टैक्सी सेवा रैपिडो (Rapido) पर परिवहन विभाग ने जोरदार कार्रवाई शुरू कर दी है, क्योंकि कंपनी निजी (सफेद नंबर) दोपहिया वाहनों का उपयोग भाड़े पर यात्री परिवहन के लिए कर रही है, जबकि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के मुताबिक ऐसा केवल परिवहन/कमर्शियल श्रेणी के वाहनों के लिए ही संभव है। इसी कारण यहाँ बाइक‑टैक्सी सेवाओं के खिलाफ “नियम‑छल”, “कानून की दुल्हन” और यात्री‑सुरक्षा की चिंता जैसे शब्द जोर‑जोर से सुनाई दे रहे हैं।

निजी बाइकों से चल रही बाइक‑टैक्सी

हल्द्वानी में रैपिडो के प्लेटफॉर्म पर हर कोई अपनी निजी बाइक जोड़कर “राइडर” बन जाता है और ऐप से भाड़े पर सवारी लेकर शहर भर में यात्रियों को ले जा रहा है। जाँच में पाया गया कि इनमें से कई बाइकों की नंबर प्लेट सफेद हैं, यानी वे निजी/पर्सनल श्रेणी में पंजीकृत हैं, जिनका यात्री ढुलाई के लिए व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह अवैध माना जाता है।

आरटीओ प्रवर्तन के आधिकारिक बयानों के अनुसार, ऐसी बाइकों का उपयोग भाड़े पर सवारी ढोने के लिए करना मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 66(1) के सीधे उल्लंघन के तहत आता है, जिसके तहत निजी वाहनों से यात्री परिवहन पर प्रतिबंध है। इसी आधार पर हल्द्वानी में कई बाइकों को अवैध संचालन के आरोप में सीज और जुर्माना लगाया जा चुका है।

हल्द्वानी आरटीओ प्रवर्तन की सख्ती

हल्द्वानी आरटीओ प्रवर्तन दस्ते ने शहर के विभिन्न मार्गों पर जाँच‑निरीक्षण चलाकर कई रैपिडो बाइकों को रोका। जाँच में साफ पाया गया कि ये निजी (नान‑ट्रांसपोर्ट) श्रेणी की बाइकें भाड़े पर यात्रियों को ले जा रही थीं, जिसके आधार पर उन पर चालान जारी कर कड़ा जुर्माना लगाया गया।

बीते हफ्तों में पाँच से अधिक निजी बाइकों को सीज किया गया और उन पर 18 से 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाना दर्ज हुआ। आरटीओ अधिकारियों का कहना है कि रैपिडो जैसी कंपनियाँ अपने ऐप के ज़रिए वास्तव में निजी वाहनों को छुपे‑छुपाए बाइक‑टैक्सी में बदल रही हैं, जिससे न तो राजस्व वसूली सही ढंग से हो पा रही है और न ही यात्री सुरक्षा के मानक पूरे उतर रहे हैं।

आरटीओ अधिकारी को “फ्रॉड” बताकर नंबर ब्लॉक

एक बड़ा विवाद तब तूल पकड़ा जब हल्द्वानी आरटीओ प्रवर्तन अधिकारी जितेंद्र सिंगवान ने अपने मोबाइल नंबर से रैपिडो की बाइक बुक कर शहर के आरटीओ दफ्तर के सामने बुलाई और फिर वहाँ मौजूद सभी बाइकों को चेक कराया। जाँच में यह निकला कि ये वाहन निजी (सफेद नंबर) पंजीकृत थे और नियमों की अनदेखी कर यात्रियों को भाड़े पर ढो रहे थे।

इस जाँच के बाद रैपिडो ने न सिर्फ अधिकारी का नंबर “फ्रॉड / ग्राहक नहीं चाहते” के रूप में ब्लॉक कर दिया, बल्कि हल्द्वानी आरटीओ कार्यालय और आसपास की लोकेशन को भी ऐप में अवैध मानते हुए वहाँ से बाइक बुक होने से रोक दिया। इस तरह की कार्यप्रणाली को अधिकारियों ने “कानून का घोर उल्लंघन” और परिवहन विभाग की जमीनी निगरानी को तकनीकी रूप से कमजोर करने की कोशिश” के रूप में बताया है।

रैपिडो के खिलाफ कार्रवाई और कानूनी आधार

हल्द्वानी में परिवहन विभाग का तर्क है कि रैपिडो जैसी सेवाएँ यह दावा करती हैं कि वे महज “एग्रीगेटर / प्लेटफॉर्म” हैं, लेकिन असल में ये निजी बाइकों को अवैध रूप से बाइक‑टैक्सी में बदलकर व्यावसायिक परिवहन चला रही हैं, जो राज्य बाइक रेंटल स्कीम, उत्तराखंड आन‑डिमांड नियम‑2020 और मोटर वाहन अधिनियम के तहत सीधा उल्लंघन है।

इस आधार पर विभाग ने हल्द्वानी सहित राज्य के अन्य शहरों में रैपिडो पर जुर्माना, नोटिस और वाहन‑सीज की श्रृंखला शुरू कर दी है। उत्तराखंड परिवहन विभाग की ओर से हाल में ओला, उबर और रैपिडो को एक‑एक लाख रुपये का जुर्माने का नोटिस भी जारी किया गया है, जिसमें इन्हें बिना वैध लाइसेंस और राज्य अनुमति के वाहन संचालन के लिए जिम्मेदार बताया गया है।

यात्री सुरक्षा और भविष्य की चिंता

हल्द्वानी के नागरिक संगठन और यातायात विशेषज्ञ यह डर जता रहे हैं कि निजी बाइकों का अवैध कमर्शियल उपयोग यात्रियों के लिए खतरा बन रहा है, क्योंकि ऐसे वाहनों के लिए नियमित यांत्रिक परीक्षण, उचित बीमा कवर और ड्राइवर‑प्रशिक्षण जैसे मानक अनिवार्य रूप से कमजोर रह जाते हैं।

कई उच्च न्यायालयों ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी बाइक‑टैक्सी सेवाओं के लिए स्पष्ट नियम‑ढांचा बनाने का निर्देश दिया है, ताकि न तो ये सेवाएं बंद हों और न ही ऐसा कानून‑खालीपन रहे जहाँ निजी बाइकें बिना लाइसेंस और सुरक्षा नियमों के भाड़े पर तैयार हो जाएं। हल्द्वानी में यह सवाल अब इस रूप में उठ रहा है कि रैपिडो की यह सेवा वास्तव में “ई‑कैब नवाचार” है या फिर “कानून की दुल्हन बनाकर नियम‑छल का नया चेहरा”?

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