उत्तराखण्ड
राज्यपाल ने की राजकीय विश्वविद्यालयों की समीक्षा, पारदर्शी परीक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर दिया जोर

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल डिग्रियां प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम, आत्मविश्वासी और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित युवाओं का निर्माण करना है, जो उद्योग, रोजगार, उद्यमिता और 21वीं सदी की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
उन्होंने विद्यार्थियों की नैतिक शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और समग्र विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए विश्वविद्यालयों में सकारात्मक एवं सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर जोर दिया।
बैठक में राज्यपाल ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभावी उपयोग के साथ मजबूत जांच एवं पुनः जांच व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही, ताकि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह लीक-प्रूफ और त्रुटिरहित बन सके।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों की पहचान उनके भवनों से नहीं, बल्कि शोध, नवाचार, अकादमिक उत्कृष्टता और शैक्षणिक उपलब्धियों से होती है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन के लिए शोध कार्य, पेटेंट, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को भी पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध ढंग से पूरा करने पर जोर देते हुए कुलपतियों से भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वविद्यालयों का विकास करने का आह्वान किया।
बैठक में सभी कुलपतियों ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों, शोध कार्यों और भविष्य की योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया। इस अवसर पर राज्यपाल सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रदेश के विभिन्न राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित रहे।


