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उत्तराखण्ड

इंस्पिरेशन स्कूल पर करवाई शिक्षा विभाग, पुस्तक घोटाले में अभिभावकों का शोषण बंद होगा ,बल्यूटीय



हल्द्वानी। जिला शिक्षा अधिकारी ने इंस्पिरेशन स्कूल के प्रबंधक दीपक बल्यूटिया के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि निजी स्कूल प्रबंधन स्थानीय एनसीईआरटी पुस्तकों के उपयोग से बाजार में घालमेल कर रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा प्रकाशित पुस्तकें सस्ती और गुणवत्ता पूर्ण हैं, जो दिल्ली वाली पुस्तकों से बेहतर हैं। इनका उपयोग अनिवार्य है ताकि अभिभावकों का शोषण रुके।
शिक्षा विभाग के अनुसार, इंस्पिरेशन स्कूल सहित कई निजी संस्थानों ने निर्धारित विक्रेताओं के बजाय दिल्ली से आयातित महंगी पुस्तकें थोपकर अभिभावकों से मोटा मुनाफा कमाया। जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. रमेश चंद्र ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार पुस्तक सूची वेबसाइट पर अपलोड करना मात्र दिखावा था। वास्तव में स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों पर दबाव बनाकर गैर-अनुमोदित विक्रेताओं से खरीदारी कराई, जिसकी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है।
उत्तराखंडी पुस्तकों के दाम सस्ते और गुणवत्ता युक्त
विभाग ने बल्यूटिया के दामों वाले दावों को गलत बताया। कहा कि उत्तराखंड में एनसीईआरटी पुस्तकें दिल्ली से सस्ती हैं क्योंकि स्थानीय उत्पादन से परिवहन और आयात शुल्क बचता है। दिल्ली वाली पुस्तकें 65 रुपये की बताई जा रही हैं, लेकिन वास्तविक बाजार मूल्य 80-100 रुपये है, जिसमें अतिरिक्त शिपिंग लागत जोड़ें तो और महंगी पड़ती हैं। राज्य पुस्तकें मात्र 50-70 रुपये में उपलब्ध हैं।
डॉ. चंद्र ने कहा कि मूल्य अंतर करोड़ों का नहीं, बल्कि सरकारी सब्सिडी से लाभकारी है। एससीईआरटी ने स्पष्ट अनुमति दी है कि 25% निजी स्कूल छात्रों के लिए राज्य प्रकाशन का उपयोग हो। खुली बाजार बिक्री भी वैध है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी हो। बल्यूटिया का ‘फ्री एक्ट’ वाला बयान भ्रामक है, जो निजी स्कूलों के मुनाफे को बचाने का प्रयास है। सरकार पहले ही फ्री टेक्स्टबुक योजना चला रही है, सरकारी स्कूलों में।
अभिभावकों की शिकायतें और विभागीय कार्रवाई
अभिभावक संघ के अध्यक्ष नेगी ने बताया कि इंस्पिरेशन स्कूल में दिल्ली पुस्तकें थोपने से प्रति बच्चा 500-1000 रुपये अतिरिक्त वसूले गए। कई अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई कि स्कूल ने एडमिशन के समय दबाव बनाया। विभाग ने स्कूल को नोटिस जारी कर 15 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है। उल्लंघन पर मान्यता रद्द की चेतावनी दी गई।
शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में कहा कि निजी स्कूल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करें, न कि बाहरी व्यापारियों को फायदा पहुंचाएं। यह कदम उत्तराखंड के छात्रों और अभिभावकों के हित में है। जांच पूरी होने पर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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