Connect with us

उत्तराखण्ड

एसएसपी कार्यालय में कांग्रेस का हंगामा लोकतंत्र की मर्यादा पर सवाल: सुरेश भट्ट

 

सरकारी कार्यालय को राजनीतिक अखाड़ा बनाना दुर्भाग्यपूर्ण, विरोध के नाम पर कानून और संस्थाओं की गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

 

हल्द्वानी। राज्य स्तरीय राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य एवं अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष सुरेश भट्ट ने हल्द्वानी में कांग्रेस नेताओं द्वारा एसएसपी कार्यालय में प्रवेश कर किए गए कथित हंगामे और अमर्यादित व्यवहार पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार लोकतंत्र ने सभी को दिया है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं कि सरकारी कार्यालयों में घुसकर अधिकारियों के साथ अभद्रता की जाए और सरकारी संस्थाओं की गरिमा को तार-तार किया जाए।

 

सुरेश भट्ट ने कहा कि एसएसपी कार्यालय कोई राजनीतिक दल का कार्यालय नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान है। ऐसे स्थान पर जाकर नारेबाजी, हंगामा अथवा अधिकारी के साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार करना लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यदि कोई आम व्यक्ति इसी तरह किसी सरकारी कार्यालय में घुसकर हंगामा करे तो क्या कांग्रेस नेता और उनके समर्थक पुलिस से उसके लिए भी उसी तरह की सहानुभूति की अपेक्षा करेंगे?

 

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए, लेकिन असहमति के नाम पर अराजकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार की किसी नीति से असहमति है तो ज्ञापन दें, धरना दें, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करें और कानून के दायरे में अपनी आवाज उठाएं। लेकिन सरकारी कार्यालय में जाकर अधिकारी पर दबाव बनाने या अभद्रता करने को लोकतांत्रिक अधिकार बताना उचित नहीं है।

 

भट्ट ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की राजनीति में लगातार बढ़ती हताशा अब उसके नेताओं के व्यवहार में भी दिखाई देने लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हल्द्वानी में आयोजित कांग्रेस की रैली में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाने के बाद कांग्रेस नेताओं में बौखलाहट देखने को मिली और इसी खिसियाहट का परिणाम एसएसपी कार्यालय में दिखाई दिया।

 

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं से समाज संयम, अनुशासन और मर्यादा की अपेक्षा करता है। जब जिम्मेदार राजनीतिक लोग ही सरकारी संस्थानों में जाकर हंगामा करेंगे तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर कानून के अनुसार कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए।

 

सुरेश भट्ट ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को यह समझना चाहिए कि सरकारी संस्थाएं किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं हैं और अधिकारी किसी पार्टी के कार्यकर्ता नहीं हैं। सरकारें आती-जाती रहती हैं, राजनीतिक दल सत्ता में आते-जाते रहते हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और कानून का शासन स्थायी होता है।

 

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध की भी एक सीमा और भाषा होती है। राजनीतिक विरोध यदि व्यक्तिगत आरोपों, अभद्र भाषा और सरकारी कार्यालयों में हंगामे तक पहुंच जाए तो यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा नहीं कही जा सकती। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से आत्ममंथन करने की अपील करते हुए कहा कि जनता के बीच अपनी बात रखने के बजाय सरकारी कार्यालयों को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच बनाना कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

भट्ट ने कहा कि लोकतंत्र में ताकत आवाज की ऊंचाई में नहीं, बल्कि तर्क, संयम और संवैधानिक मर्यादा में होती है। राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे संस्थाओं का सम्मान करें और जनता के सामने सकारात्मक राजनीतिक संस्कृति का उदाहरण प्रस्तुत करें।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad

More in उत्तराखण्ड

Trending News

Follow Facebook Page