उत्तराखण्ड
अनिल बलूनी के बाद अब त्रिवेंद्र सिंह रावत की दस्तक: गदरपुर में बंद कमरों की मुलाकातों ने बढ़ाया उत्तराखंड बीजेपी का सियासी पारा ।
अजय सिंह – वरिष्ठ संवाददाता
उत्तराखंड की राजनीति में बढ़ी तपिश, रणनीतिक मुलाकातों का दौर शुरू
देहरादून/गदरपुर: वर्ष 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी अचानक बढ़ गई है। ऊधमसिंह नगर जिले की गदरपुर विधानसभा सीट इस समय राज्य के सियासी घटनाक्रम का मुख्य केंद्र बन चुकी है। लगातार हो रही हाई-प्रोफाइल मुलाकातों के बाद इस बात की प्रबल संभावनाएं जताई जा रही हैं कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर किसी बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया दौरा
ताजा घटनाक्रम के तहत, पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता त्रिवेंद्र सिंह रावत मंगलवार को अचानक गदरपुर से विधायक अरविंद पांडे के निवास स्थान पर पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच हुई इस शिष्टाचार भेंट के बाद से ही क्षेत्र का सियासी तापमान बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में अभी समय होने के बावजूद, पार्टी के भीतर आगामी चुनावी रणनीति को लेकर शीर्ष स्तर पर मंथन और किलेबंदी शुरू हो चुकी है।
सांसद अनिल बलूनी की बैठक के तुरंत बाद दूसरी बड़ी हलचल
गौरतलब है कि यह हलचल महज़ एक संयोग नहीं मानी जा रही है। इससे ठीक एक दिन पहले, पौड़ी गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी ने भी अरविंद पांडे के आवास पर पहुंचकर उनसे गुप्त वार्ता की थी। लगभग आधे घंटे तक चली इस बंद कमरा बैठक के तुरंत बाद अब त्रिवेंद्र सिंह रावत का वहां पहुंचना कई बड़े राजनीतिक इशारे कर रहा है। हालांकि, पार्टी संगठन या नेताओं की तरफ से इन मुलाकातों के उद्देश्य को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है।
विवादों के साए और चुनावी समीकरणों पर टिकी नजरें
इस पूरी सियासी मुस्तैदी को विधायक अरविंद पांडे की हालिया पृष्ठभूमि से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले दो वर्षों के दौरान गदरपुर विधायक का नाम भूमि विवादों और कथित भू-माफियाओं से जुड़ाव को लेकर चर्चाओं में रहा है। इसके अतिरिक्त, उनके करीबियों और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण जैसे संवेदनशील मुद्दों के कारण स्थानीय राजनीति में उन्हें लेकर काफी बयानबाजी होती रही है।
ऐसे माहौल में, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा अरविंद पांडे के निर्वाचन क्षेत्र में दिखाई जा रही यह सक्रियता इस बात का संकेत है कि पार्टी डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) की कोशिशों में जुट गई है, ताकि 2027 की चुनावी राह में संगठन के सामने कोई बड़ी चुनौती खड़ी न हो सके।
