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उत्तराखण्ड

पुस्तकदान कार्यक्रम में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी सम्मानित, साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान को मिला सम्मान

एक लाख से अधिक पुस्तकों का निःशुल्क वितरण कर चुका है उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, विद्यार्थियों तक ज्ञान पहुंचाना है विश्वविद्यालय का संकल्प

हल्द्वानी। विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ाने, ज्ञान के प्रसार और भारतीय ज्ञान परंपरा को मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से कुमाऊं विश्वविद्यालय परिसर में पुस्तकदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उनके साहित्यिक एवं सामाजिक कार्यों में उल्लेखनीय योगदान के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने उन्हें सम्मानित किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तक का निःशुल्क वितरण भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण घटक रहा है। भारतीय संस्कृति में ज्ञान को साझा करना और उसे समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना हमेशा से महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का मूल ध्येय है कि प्रत्येक जिज्ञासु विद्यार्थी तक पुस्तकें और अध्ययन सामग्री पहुंचाई जाए, ताकि आर्थिक या अन्य किसी कारण से किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा प्रभावित न हो।

उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य को लेकर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय अब तक एक लाख से अधिक पुस्तकों का निःशुल्क वितरण कर चुका है। विश्वविद्यालय लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है,कार्यक्रम के दौरान दोनों विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति में पुस्तकदान की महत्ता तथा शिक्षा के व्यापक प्रसार पर चर्चा की गई। पुस्तकदान कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न विषयों के सैकड़ों विद्यार्थियों ने अपनी आवश्यकता और रुचि के अनुरूप पुस्तकें प्राप्त कीं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराकर उनकी शैक्षणिक और बौद्धिक क्षमता को विकसित करने के अवसर प्रदान करना रहा।जिनसे शिक्षा की पहुंच व्यापक हो और विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकें।
कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट द्वारा प्रो. लोहनी को सम्मानित किए जाने को उनके साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान के प्रति सम्मान के रूप में देखा गया। कार्यक्रम ने दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और विद्यार्थियों के हित में साझा प्रयासों को भी एक नई दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम में परिसर निदेशक प्रो. संजय पंत, कुलसचिव प्रो. रीतेश साह, प्रो. ललित तिवारी, अतिरिक्त निदेशक क्षेत्रीय सेवाएं डॉ. शशांक शुक्ल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षाविद् एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। पुस्तकदान के माध्यम से विद्यार्थियों तक ज्ञान पहुंचाने की इस पहल की सराहना की गई।

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