उत्तराखण्ड
क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में शिथिलता की मांग, छोटे निजी अस्पतालों को मिले राहत: डॉ. डी.सी. पंत

पवनीत सिंह बिंद्रा
हल्द्वानी। चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने और आम जनमानस को सुलभ एवं किफायती उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चिकित्सक डॉ. डी.सी. पंत ने चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों में उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुरूप शिथिलता देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को छोटे निजी अस्पतालों और स्वतंत्र रूप से चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे चिकित्सकों के हितों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
डॉ. डी.सी. पंत ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के स्टेट प्रेसिडेंट पद के लिए रामनगर में शपथ लेंगे । उनका कहना है कि चिकित्सा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने, चिकित्सकों की समस्याओं को उचित मंच पर उठाने और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी पहल की आवश्यकता है। उन्होंने चिकित्सा सेवाओं में सुधार को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए कहा कि चिकित्सकों और मरीजों, दोनों के हितों का ध्यान रखकर ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति को बेहतर उपचार प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जिसमें सरकारी अस्पतालों के साथ छोटे निजी अस्पतालों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी रहे।
छोटे अस्पतालों को राहत देने की जरूरत क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लेकर डॉ. पंत ने कहा कि उत्तराखंड में इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करते समय छोटे अस्पतालों की वास्तविक परिस्थितियों को समझना आवश्यक है। उत्तर प्रदेश में जिस प्रकार छोटे चिकित्सा संस्थानों के लिए नियमों में शिथिलता की व्यवस्था की गई है, उसी प्रकार उत्तराखंड में भी व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक जब अपना निजी अस्पताल शुरू करता है तो उसके साथ अन्य चिकित्सक भी जुड़ते हैं। कई छोटे अस्पतालों में एक चिकित्सक के साथ चार अन्य चिकित्सक मिलकर आम लोगों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। ऐसे अस्पताल सीमित संसाधनों में स्थानीय लोगों को चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हैं। ऐसे में बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों के समान सभी मानक छोटे अस्पतालों पर लागू करना व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है।
कॉरपोरेट चिकित्सा व्यवस्था के बीच आम आदमी के हितों की चिंता डॉ. पंत ने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा क्षेत्र में कॉरपोरेट अस्पतालों का विस्तार तेजी से हो रहा है। ऐसे में छोटे निजी अस्पतालों की उपयोगिता को नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए। आम आदमी अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार छोटे निजी अस्पतालों में उपचार करा सकता है, जबकि बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों में इलाज का खर्च अधिक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि छोटे अस्पतालों पर नियमों का अत्यधिक बोझ पड़ेगा तो इसका असर उनकी सेवाओं और आम मरीजों की चिकित्सा सुविधा पर भी पड़ सकता है। इसलिए सरकार को ऐसा संतुलित कानून लागू करना चाहिए, जिससे मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता सुनिश्चित होने के साथ छोटे अस्पतालों का संचालन भी सुचारु रूप से चलता रहे।
बीपीएल परिवारों के लिए बने विशेष मानक उन्होंने सरकार से बीपीएल कार्डधारकों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विशेष व्यवस्था बनाने की मांग की। उनका कहना है कि पात्र लोगों की पहचान के लिए स्पष्ट मानक निर्धारित किए जाने चाहिए, जिससे जरूरतमंद मरीजों को सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके और आर्थिक परेशानी के कारण किसी को उपचार से वंचित न रहना पड़े।
IMA के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं में सुधार का प्रयास डॉ. पंत ने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के माध्यम से चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने और चिकित्सकों की समस्याओं के समाधान की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। उनका प्रयास है कि चिकित्सा सेवाओं में सुधार के साथ चिकित्सकों और मरीजों दोनों के हितों का संरक्षण हो।
उन्होंने कहा कि बेहतर चिकित्सा सुविधाएं, पारदर्शी व्यवस्था, किफायती उपचार और जरूरतमंद मरीजों को प्राथमिकता देना किसी भी स्वस्थ समाज की बुनियादी आवश्यकता है। सरकार को भी छोटे निजी अस्पतालों की समस्याओं को समझते हुए क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों में व्यावहारिक शिथिलता प्रदान करनी चाहिए।
डॉ. डी.सी. पंत ने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगी और छोटे निजी अस्पतालों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें चिकित्सकों को बेहतर सेवाएं देने का अवसर मिले और आम जनमानस को सम्मानजनक, गुणवत्तापूर्ण तथा किफायती उपचार उपलब्ध हो सके।





