उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय का 21वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया, सात कार्मिकों को किया सम्मानित






हल्द्वानी, 31 अक्टूबर। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय का 21वां स्थापना दिवस समारोह शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में भव्यता और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक की विकास यात्रा, शैक्षणिक उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही विश्वविद्यालय की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सात कार्मिकों को सम्मानित किया गया।
समारोह का शुभारंभ संगीत विभाग के शिक्षार्थियों द्वारा प्रस्तुत समूहगान, शास्त्रीय संगीत और उत्तराखण्ड के पारंपरिक लोकगीतों से हुआ। वहीं योग विभाग के शिक्षार्थियों ने आकर्षक योग प्रदर्शन कर उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। विश्वविद्यालय के कुलगीत और राष्ट्रगान के साथ समारोह आगे बढ़ा।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति एवं उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक तथा श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन उपस्थित रहे।
स्वागत संबोधन में CIQA निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने विश्वविद्यालय की 21 वर्षों की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक उच्च शिक्षा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पूर्व कुलपतियों के योगदान, डिजिटल शिक्षा के विस्तार, सामुदायिक रेडियो ‘हैलो हल्द्वानी 91.2 एफएम’ तथा क्षेत्रीय अध्ययन केंद्रों के माध्यम से शिक्षार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी दी।
विशिष्ट अतिथि प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने विश्वविद्यालय की स्थापना के समय संस्थापक टीम द्वारा किए गए प्रयासों और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान की सफलता के पीछे दूरदर्शी सोच, प्रतिबद्धता और सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के निरंतर विकास और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं प्रो. विनय कुमार पाठक ने स्थापना के शुरुआती दौर की चुनौतियों को याद करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों और मजबूत संकल्प के बल पर विश्वविद्यालय ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा को भविष्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया।
मुख्य अतिथि भगत सिंह कोश्यारी ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे ज्ञान, कौशल और जीवनोपयोगी दक्षताओं से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के साथ समन्वित करने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान दे सके।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय लगातार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने प्रवेश संख्या में वृद्धि, अध्ययन सामग्री वितरण व्यवस्था में सुधार, परीक्षाओं का समयबद्ध आयोजन और मात्र 20 दिनों में परीक्षा परिणाम घोषित करने जैसी उपलब्धियों को महत्वपूर्ण बताया
।समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की प्रगति और कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सात कार्मिकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में हेम चन्द्र छिम्वाल, विनोद बिरखानी, कंचन बिष्ट, अनिल नैलवाल, मोहन चन्द्र पांडे, चन्द्रशेखर सुयाल एवं व्यास सिंह शामिल रहे। मुख्य अतिथि भगत सिंह कोश्यारी ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे ज्ञान, कौशल और जीवनोपयोगी दक्षताओं से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के साथ समन्वित करने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान दे सके।उन्होंने कहा कि नवप्रवेशित शिक्षार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था से परिचित कराने के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके साथ ही सामुदायिक रेडियो और डिजिटल माध्यमों के जरिए ऑडियो-वीडियो शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराकर दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक शिक्षा की पहुंच को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
कुलपति ने विश्वविद्यालय की स्थापना और विकास में योगदान देने वाले पूर्व कुलपतियों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी नवाचार, सामूहिक सहभागिता और समर्पण के साथ विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
इस अवसर पर सांस्कृतिक एवं योग प्रस्तुतियों में प्रतिभाग करने वाले संगीत एवं योग विभाग के शिक्षार्थियों तथा प्राध्यापकों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शशांक शुक्ला एवं डॉ. सुचित्रा अवस्थी ने किया। अंत में कुलसचिव खेमराज भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अतिथियों, अधिकारियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों, शिक्षार्थियों तथा आयोजन समिति, ICT टीम और मीडिया टीम का आभार व्यक्त किया।
समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न विद्याशाखाओं एवं विभागोंअध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय लगातार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने प्रवेश संख्या में वृद्धि, अध्ययन सामग्री वितरण व्यवस्था में सुधार, परीक्षाओं का समयबद्ध आयोजन और मात्र 20 दिनों में परीक्षा परिणाम घोषित करने जैसी उपलब्धियों को महत्वपूर्ण बताया। के निदेशक, प्राध्यापक, शिक्षण एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में शिक्षार्थी मौजूद रहे। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुमुख्य अतिथि भगत सिंह कोश्यारी ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे ज्ञान, कौशल और जीवनोपयोगी दक्षताओं से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के साथ समन्वित करने पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान दे सके।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की प्रगति और कार्यों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सात कार्मिकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में हेम चन्द्र छिम्वाल, विनोद बिरखानी, कंचन बिष्ट, अनिल नैलवाल, मोहन चन्द्र पांडे, चन्द्रशेखर सुयाल एवं व्यास सिंह शामिल रहे।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय लगातार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने प्रवेश संख्या में वृद्धि, अध्ययन सामग्री वितरण व्यवस्था में सुधार, परीक्षाओं का समयबद्ध आयोजन और मात्र 20 दिनों में परीक्षा परिणाम घोषित करने जैसी उपलब्धियों को महत्वपूर्ण बताया।आ।





