उत्तराखण्ड
उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने किया आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान का दौरा



मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा जैसे स्थानीय अनाजों के पोषक तत्वों पर शोध जारी: डॉ. भारती कुलकर्णी
बचपन से ही स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित करना जरूरी: आईसीएमआर-एनआईएन निदेशक
हैदराबाद, 2 सितंबर 2026। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित हैदराबाद प्रेस दौरे के दूसरे दिन उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन), हैदराबाद का भ्रमण किया। इस दौरान पत्रकारों को संस्थान में चल रहे पोषण संबंधी अनुसंधान, जन स्वास्थ्य शिक्षा तथा राष्ट्रीय नीतियों एवं कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण में संस्थान की भूमिका की जानकारी दी गई।
आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए खाद्य संरचना, पोषक तत्वों की आवश्यकताओं और आहार संबंधी दिशा-निर्देशों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण तैयार करने में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इंडियन फूड कंपोजिशन टेबल्स में देश में उपलब्ध विभिन्न खाद्य पदार्थों में ऊर्जा, प्रोटीन, सूक्ष्म पोषक तत्वों और खनिजों से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। यह जानकारी शोधकर्ताओं, खाद्य उद्योग तथा जन स्वास्थ्य नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में उपयोग की जाती है।
उन्होंने भारतीयों के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकताओं और अनुशंसित आहार संबंधी दिशा-निर्देशों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। ये दिशा-निर्देश विभिन्न आयु वर्गों और शारीरिक अवस्थाओं के अनुसार पोषण संबंधी आवश्यकताओं को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि स्वस्थ खान-पान की आदतों का विकास बचपन की शुरुआती अवस्था से ही किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के आहार में अतिरिक्त चीनी के सेवन से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कुपोषण के दोहरे बोझ पर चिंता
आईसीएमआर-एनआईएन निदेशक ने कुपोषण के दोहरे बोझ पर चिंता व्यक्त करते हुए बच्चों में बढ़ते अधिक वजन और मोटापे की समस्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निष्क्रिय जीवनशैली तथा वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
उन्होंने खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल पर्याप्त भोजन की उपलब्धता से बेहतर पोषण की स्थिति सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए आहार में विविधता के साथ-साथ खान-पान और जीवनशैली से जुड़े व्यवहार में सकारात्मक बदलाव भी आवश्यक हैं।
उत्तराखंड के स्थानीय अनाजों पर हो रहा शोध
डॉ. भारती कुलकर्णी ने बताया कि उत्तराखंड के स्थानीय कृषि उत्पादों एवं मोटे अनाजों—मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा—में मौजूद विशिष्ट पोषक तत्वों का अध्ययन करने के लिए शोध कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि रागी (फिंगर मिलेट) के सेवन से एनीमिया में कमी पर इसके प्रभाव का आकलन करने के लिए नैदानिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन भी किए जा रहे हैं।
मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण
मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएमआर-एनआईएन के पोषण सूचना, संचार एवं स्वास्थ्य शिक्षा प्रभाग के प्रमुख एवं वैज्ञानिक-जी डॉ. सुब्बा राव द्वारा आयोजित तकनीकी सत्रों में भी भाग लिया।
डॉ. सुब्बा राव ने वर्तमान पोषण संबंधी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए अल्पपोषण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तथा जीवनशैली से जुड़े चयापचय संबंधी विकारों के एक साथ मौजूद होने की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पोषण संबंधी जानकारी और आम लोगों की दैनिक खान-पान की आदतों के बीच की दूरी को पाटने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से खाद्य एवं पोषण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और प्रमाण-आधारित आहार संबंधी आदतों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार पत्रकारिता करने का आह्वान किया।
अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का किया भ्रमण
मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएमआर-एनआईएन की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का भी भ्रमण किया। इस दौरान पत्रकारों ने संस्थान के शोधकर्ताओं से संवाद कर खाद्य विश्लेषण और लिपिड रसायन विज्ञान के क्षेत्र में चल रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी प्राप्त की।
हैदराबाद प्रेस दौरे के सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल ने सालार जंग संग्रहालय का भी भ्रमण किया। पत्रकारों ने संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक एवं अभिलेखीय संग्रहों को देखा और हैदराबाद की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी प्राप्त की।

















