उत्तराखण्ड
आईआईटी रुड़की ने बनाया स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक बैंडेज, शरीर की हरकत से तेज होगा घाव भरना




देहरादून/रुड़की, 11 सितंबर 2026 — भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के शोधकर्ताओं ने एक क्रांतिकारी स्व-संचालित स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक बैंडेज विकसित किया है, जो चलने, सांस लेने और अन्य प्राकृतिक शारीरिक गतिविधियों से ऊर्जा प्राप्त कर घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करता है।
तकनीक का नाम: 3D-MIDAS
इस तकनीक को 3D-MIDAS (3D Monolithic Integrated Dipolar-Ionic Fibrous Architectural Scaffold) कहा गया है, जो पीयर-रिव्यूड जर्नल Nano Energy के अगस्त 2026 अंक में प्रकाशित हुई है।
कैसे काम करता है यह स्मार्ट बैंडेज?
बैंडेज त्वचा की प्राकृतिक हरकतों (चलना, सांस लेना, हाथ-पैर हिलाना) के दौरान खिंचता है।
इस खिंचाव से PVDF-आधारित फाइबर और आयनिक नेटवर्क मिलकर बिना बैटरी या तार के विद्युत संकेत उत्पन्न करते हैं।
ये विद्युत संकेत घाव की प्राकृतिक विद्युत पर्यावरण को मजबूत करते हैं, जिससे कोशिकाओं का प्रवासन, गुणन और नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण बढ़ता है।
प्रमुख विशेषताएं
800% तक खिंचने की क्षमता: शरीर की गतिविधियों के अनुरूप पूरी तरह ढल सकता है।
वायु-संचार योग्य और छिद्रयुक्त संरचना: घाव से निकलने वाले द्रव (exudate) का प्रबंधन करता है।
लगभग 1 महीने तक उपयोग योग्य: हाइड्रोफोबिक बैंडेज लंबे समय तक टिकाऊ रहता है।
अनुमानित लागत: बड़े पैमाने पर निर्माण होने पर ₹50–100 प्रति बैंडेज।
प्रयोगशाला और पशु अध्ययन के परिणाम
कोशिका प्रसार (cell proliferation): नियंत्रण की तुलना में 3 गुना अधिक।
कोशिका प्रवासन (cell migration): 2.5 गुना अधिक।
पशु अध्ययन: 13–15 दिनों में 90–95% घाव बंद होने की स्थिति, नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण बढ़ा।
स्थिरता: 500 खिंचाव चक्रों और 3 महीने के दीर्घकालिक परीक्षण में स्थिर विद्युत प्रदर्शन।
शोध दल और सहयोग
प्रधान अन्वेषक: प्रो. कौशिक पारिदा (विभाग: पॉलिमर एवं प्रोसेस इंजीनियरिंग, आईआईटी रुड़की)।
प्रथम लेखक: विशु वर्मा, रोमि गर्ग, सायंती मल्लिक, अनीश अली (आईआईटी रुड़की)।
सहयोगी संस्थान: इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST), मोहाली — कनिका, जट्टिन कुमार, रेहान खान।
वित्तपोषण: ANRF, ICMR, DST, PMRF (भारत सरकार की एजेंसियाँ)।
भविष्य के संभावित अनुप्रयोग
दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाएं (remote healthcare)
आपदा प्रतिक्रिया और आपातकालीन परिस्थितियाँ
रक्षा एवं सैन्य अभियान (अध्ययन में अभी मूल्यांकन नहीं हुआ)
सीमाएं और आगे की राह
अभी मानव नैदानिक अध्ययन बाकी हैं; नियमित चिकित्सा उपयोग से पहले ये आवश्यक होंगे।
वर्तमान अध्ययन में सैन्य उपयोग का मूल्यांकन नहीं किया गया है।
आईआईटी रुड़की निदेशक का बयान
प्रो. K. K. Pant, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने कहा:
“अनुसंधान का वास्तविक मूल्य समाज से जुड़े महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान में योगदान देने की इसकी क्षमता में निहित है। यह कार्य इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि उन्नत सामग्रियों और अंतर्विषयक अनुसंधान को किस प्रकार व्यावहारिक स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता के समाधान की दिशा में केंद्रित किया जा सकता है।”
प्रो. कौशिक पारिदा का कहना
“हम मौजूदा विद्युत-आधारित घाव भरने वाली कई प्रणालियों की एक मूलभूत सीमा को दूर करना चाहते थे, जिसमें बाहरी ऊर्जा स्रोत की आवश्यकता होती है। 3D-MIDAS के साथ, शरीर की गतिविधियाँ स्वयं विद्युत उत्तेजना उत्पन्न करने के लिए आवश्यक यांत्रिक ऊर्जा प्रदान करती हैं।”

















