उत्तराखण्ड
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान को मिलेगी रफ़्तार: डीएम सविन बंसल का कड़ा रुख, तहसीलों को 7 दिन का अल्टीमेटम*
अजय सिंह,,

इस बैठक के मुख्य बिंदु और बड़े फैसले नीचे दिए गए हैं
:1. *लापरवाह अफसरों को सख्त चेतावनी*
जिलाधिकारी ने जिले के सभी उप जिलाधिकारियों (SDM) को दोटूक निर्देश दिए हैं कि वे अपनी तहसीलों में लंबित सभी सूचियों और मामलों को गंभीरता से खंगालें। अगले 7 दिनों के भीतर हर हाल में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं। डीएम ने साफ लफ़्जों में कहा:
“राज्य आंदोलनकारियों से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लेटलतीफ़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी विभाग ने तय समय में अपनी रिपोर्ट नहीं दी, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई होगी।”
2. *पारदर्शिता के लिए आंदोलनकारियों की ही ली जाएगी मदद*
चिन्हीकरण की इस पूरी प्रक्रिया को विवादों से दूर और निष्पक्ष रखने के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। अब स्थानीय आंदोलनकारी समितियों के सदस्यों को भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि कोई भी असली हकदार इस सम्मान से वंचित न रह जाए। 3. *फाइलों और सबूतों के अभाव का निकाला तोड़* 6 महीने की मोहलत: शासन ने साल 2021 तक के लंबित आवेदनों के निपटारे के लिए प्रशासन को 6 महीने का अतिरिक्त समय दिया है।।वरिष्ठों की गवाही बनेगी आधार: जिन आंदोलनकारियों के आधिकारिक रिकॉर्ड या दस्तावेज गुम हो चुके हैं, उन्हें न्याय दिलाने का एक नया रास्ता निकाला गया है। जिला प्रशासन ने शासन को पत्र भेजकर यह सिफारिश की है कि ऐसे मामलों में वरिष्ठ आंदोलनकारियों और समिति के सदस्यों के शपथ पत्र (Affidavit) को ही प्रमाण मानकर चिन्हीकरण किया जाए। इस पर शासन के अंतिम फैसले का इंतजार है।आंदोलनकारियों ने जताया भरोसा* प्रशासन के इस संवेदनशील और तेज तर्रार रुख को देखकर बैठक में मौजूद आंदोलनकारियों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने जिलाधिकारी का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि इस कार्यकाल में उनके सालों पुराने संघर्ष को मुकाम मिलेगा और हर पात्र व्यक्ति को उसका हक मिल सकेगा। *बैठक में यह अधिकारी और चेहरे रहे मौजूद*इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, पुलिस अधीक्षक जया बलूनी, और उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी प्रशासनिक अमले की तरफ से मौजूद रहे। वहीं आंदोलनकारियों की ओर से सरोज डिमरी, उर्मिला शर्मा, निर्मला बिष्ट, पुष्पलता सिलमाना, जयप्रकाश उत्तराखण्डी, योगेश भट्ट, ओपी उनियाल, देवी गोदियाल, डीएस गुंसाई और विवेकानंद खण्डूरी समेत कई वरिष्ठ साथियों ने अपनी बात प्रमुखता से रखी।
