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उत्तराखण्ड

विभागीय चेकिंग के बाद भी रोक नहीं, व्यापारी बोले—छोटों पर दबाव, बड़े बच निकलते हैं

पवनीत सिंह बिंद्रा 

उद्यम सिंह नगर राज्य में प्रवेश बिंदुओं पर कड़ी चेकिंग और विभागीय निगरानी के बावजूद चोरी और कर-चोरी की घटनाएं थम नहीं रही हैं। व्यापारी वर्ग का आरोप है कि पूरे तंत्र में कार्रवाई का असर उन लोगों तक नहीं पहुंच पाता, जिनके इशारे पर यह खेल चल रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि जांच के नाम पर छोटे व्यापारियों को ज्यादा परेशान किया जाता है, जबकि बड़े नेटवर्क और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई बेहद कम होती है। इसी वजह से बाजार में यह धारणा मजबूत हो रही है कि बिना ऊंची पहुंच और अंदरूनी संरक्षण के इतना बड़ा खेल संभव नहीं है।

सूत्रों के अनुसार कई मामलों में फर्जी फर्म, बोगस बिल, गलत पंजीकरण और सिंडिकेट आधारित लेनदेन के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया है। ऐसे मामलों ने विभागीय व्यवस्था की गंभीरता और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े किए हैं।

व्यापारी संगठनों का कहना है कि ईमानदार कारोबारियों को भय और दबाव में रखने के बजाय असली दोषियों तक पहुंचना जरूरी है। उनका मानना है कि केवल चेकिंग बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि खुफिया निगरानी, पारदर्शी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करना ज्यादा जरूरी है।  राज्य में प्रवेश के दौरान वाहनों की सघन चेकिंग और विभागीय निगरानी के बावजूद चोरी और कर-चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। व्यापारी वर्ग का आरोप है कि कार्रवाई का सबसे अधिक दबाव छोटे व्यापारियों पर डाला जाता है, जबकि बड़े नेटवर्क, फर्जी फर्मों और प्रभावशाली लोगों तक विभाग की पहुंच नहीं बन पाती। व्यापारियों ने यह भी कहा कि बिना अधिकार और ऊंची पहुंच के ऐसा संगठित खेल चलना मुश्किल है। इस पूरे मामले में सिंडिकेट और मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। व्यापारियों ने विभाग से निष्पक्ष जांच, कठोर कार्रवाई और ईमानदार कारोबारियों को राहत देने की मांग की है। जो व्यापारी राज्य को टैक्स को भरपूर देता है एवं उन्हें ही विभाग द्वारा निशाना साधा जाता है ,

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