उत्तराखण्ड
दशमेश पिता के तपस्थान पर झुका शीश: गुरु चरणों के मिलाप के आंसू और ‘जो बोले सो निहाल’ की गूंज के बीच खुले श्री हेमकुंड साहिब के कपाट

चमोली,,उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित सिखों के परम पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के बीच ग्रीष्मकाल के लिए विधिवत खोल दिए गए। इस ऐतिहासिक और भावुक क्षण के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से पहुंचे तीन हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम में माथा टेककर गुरु चरणों का आशीर्वाद प्राप्त किया। कपाट खुलते ही पूरा परिसर ‘सत श्री अकाल’ और ‘जो बोले सो निहाल… सत श्री अकाल’ के जयघोष से गूंज उठा।
कपाटोद्घाटन की प्रक्रिया पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मर्यादाओं के अनुसार संपन्न हुई। सुबह ‘सचखंड’ से गुरु ग्रंथ साहिब को पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मुख्य दरबार साहिब में सुशोभित किया गया। इसके बाद विशेष अखंड पाठ, शबद कीर्तन और सामूहिक अरदास का आयोजन हुआ, जिसमें विश्व शांति, मानव कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना की गई।
श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि यात्रा की सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गई हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि यात्रा का पहला आधिकारिक जत्था शुक्रवार को पंच प्यारों की अगुवाई में पारंपरिक बैंड-बाजों और पवित्र निशान साहिब की छत्रछाया में रवाना हुआ था। श्रद्धालुओं ने यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ाव घांघरिया गुरुद्वारा में रात्रि विश्राम किया और शनिवार तड़के मुख्य धाम के लिए प्रस्थान किया।
हेमकुंड साहिब यात्रा के शुभारंभ के साथ ही भ्यूंडार घाटी में पर्यटन और स्थानीय व्यापार गतिविधियों को भी नई गति मिलने लगी है। होटल, घोड़ा-खच्चर संचालक, स्थानीय दुकानदार और अन्य पर्यटन व्यवसायियों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
इधर, प्रबंधन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान अनुशासन, संयम, स्वच्छता और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है, ताकि पवित्र धाम की गरिमा और पर्यावरणीय संतुलन सुरक्षित रह सके।
