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उत्तराखण्ड

गंगा मैया की पवित्रता के साथ खिलवाड़ क्यों? हरिद्वार के दृश्य ने झकझोरा, आस्था के साथ स्वच्छता की जिम्मेदारी भी जरूरी

 

हरिद्वार,। तीर्थ यात्रा केवल आस्था और श्रद्धा का विषय नहीं है, बल्कि तीर्थस्थलों की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखना भी प्रत्येक श्रद्धालु की जिम्मेदारी है। कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा मैया का जल लेने पहुंच रहे हैं, लेकिन गंगा तट और आसपास फैली गंदगी के दृश्य मन को विचलित करने वाले हैं।

गंगा मैया को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। श्रद्धालु गंगा जल को अपने साथ ले जाकर भगवान का अभिषेक करते हैं और इसे पवित्र प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस स्थान से हम पवित्र जल लेकर जा रहे हैं, उसी स्थान को दूषित करने के प्रति हम इतने लापरवाह क्यों हैं?

हरिद्वार में सफाई व्यवस्था में जुटे कर्मी दिन-रात मेहनत कर तीर्थस्थल को स्वच्छ रखने का प्रयास करते हैं। एक सफाई कर्मी द्वारा साझा किए गए गंगा तट के दृश्य ने इस गंभीर विषय पर सोचने को मजबूर कर दिया। श्रद्धा के नाम पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का यह भी दायित्व है कि वह गंगा तट पर कूड़ा न फैलाए और दूसरों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करे।

तीर्थ पर जाकर जल लेना और पूजा-अर्चना करना हमारी आस्था है, लेकिन उस आस्था की वास्तविक परीक्षा तब होती है जब हम उस पवित्र स्थान को स्वच्छ रखने के लिए अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभाते हैं। केवल सरकार और सफाई कर्मियों के भरोसे गंगा की स्वच्छता सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

गंगा की पवित्रता केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी है। इसलिए जरूरी है कि हर श्रद्धालु संकल्प ले कि वह गंगा में या उसके तट पर किसी प्रकार की गंदगी नहीं फैलाएगा। गंगा मैया को स्वच्छ और निर्मल रखना ही सच्ची श्रद्धा और सच्ची सेवा है।

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