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उत्तराखण्ड

गणेश विसर्जन प्रथा पर रोक लगाने की मांग, पहाड़ी आर्मी ने सौंपा मुख्यमंत्री को ज्ञापन,

हल्द्वानी, पहाड़ी आर्मी’ संगठन ने आज सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर गणेश महोत्सव में गणेश मूर्ति विसर्जन की प्रथा को तत्काल बंद करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड को धार्मिक ग्रंथों में भगवान गणेश, माता पार्वती और शिवजी का घर कहा गया है और यहाँ मूर्तियों की स्थापना का ही उल्लेख है, विसर्जन का नहीं। वे मानते हैं कि गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन से पहाड़ी संस्कृति की आस्था को ठेस पहुँचती है और यह परंपरा ‘स्थानीय संस्कृति के साथ छेड़छाड़’ जैसा है।

पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि सरकार को देवी-देवताओं के सम्मान में गणेश महोत्सव भव्यता से आयोजित करना चाहिए, किंतु मूर्ति विसर्जन पर तत्काल रोक का आदेश पारित करें। उन्होंने चेतावनी दी कि माँग पूरी न होने पर पहाड़ी समाज को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

संगठन महामंत्री विनोद शाही व जिला अध्यक्ष मोहन कांडपाल ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड की संस्कृति बॉलीवुड की देखा-देखी में कमजोर हो रही है, जबकि गणेश विसर्जन की प्रथा धार्मिक व तर्कसंगत नहीं है। महिला पदाधिकारी दीपा पांडे, कविता जीना व कंचन रौतेला ने इस कृत्य को देवभूमि के अपमानजनक बताया और अविलंब रोक लगाने की मांग की। नगर अध्यक्ष भुवन पांडे तथा जिला संगठन मंत्री राजेंद्र कांडपाल ने भी चेतावनी दी कि मांग पूरी न होने पर वे जनांदोलन शुरू करेंगे।

इस दौरान फौजी मदन फरत्याल, फौजी दिनेश जोशी, फौजी कमलेश जेठी, अंजू पांडे, बबीता जोशी, साक्षी, गीता देवी, पवन शर्मा, नारायण सिंह बरगली, मनोज रावत, कपिल शाह, हरेंद्र सिंह राणा, विजय भंडारी, पवन ज्याला समेत अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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