उत्तराखण्ड
देहरादून: मित्र पुलिस की मुस्तैदी से बची एक मासूम बच्ची की जान
अजय सिंह देहरादून
निरंजनपुर चौकी पर 9 बजे दर्ज हुई मिसिंग कंप्लेंट, 3 घंटे में सुरक्षित बरामद

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मित्र पुलिस का एक और जीवंत उदाहरण सामने आया है। आज शाम करीब 9:00 बजे निरंजनपुर चौकी पर एक चिंतित परिवार ने अपनी मासूम बच्ची के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार मिसिंग केस में 24 घंटे पूरे होने पर ही औपचारिक एफआईआर दर्ज की जाती है, लेकिन ‘मित्र पुलिस’ के नाम से मशहूर उत्तराखंड पुलिस ने इस नियम को दरकिनार कर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।
आशीष नैनवाल की फुर्ती से शुरू हुई सर्च ऑपरेशन
निरंजनपुर चौकी प्रभारी आशीष नैनवाल ने मामले की नाजुकता को तुरंत भांप लिया। उन्होंने अपनी टीम को निर्देश दिए कि आसपास के प्रमुख स्थानों के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जाए। साथ ही, उन्होंने सब-इंस्पेक्टर प्रवीन पुंडीर को फोन पर सूचित किया। प्रवीन पुंडीर उस समय अपने घर पहुंच चुके थे, लेकिन उन्होंने बिना किसी देरी के वापस ड्यूटी संभाल ली और पूरी टीम को एकजुट कर सर्च में जुटा दिया। टीम ने क्षेत्र के बाजारों, गलियों, पार्कों और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, साथ ही स्थानीय लोगों से भी जानकारी इकट्ठा की।
3 घंटों में मिली सफलता, बच्ची पूर्णतः सुरक्षित
कड़ी मेहनत रंग लाई और मात्र 3 घंटों के भीतर पुलिस ने बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया। बच्ची न केवल शारीरिक रूप से ठीक थी, बल्कि मानसिक रूप से भी पूरी तरह सामान्य पाई गई। पुलिस ने उसे तुरंत उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों ने आशीष नैनवाल और प्रवीन पुंडीर को गले लगाकर तहे-दिल से धन्यवाद दिया और ढेरों आशीर्वाद प्रदान किए। एक परिजन ने कहा, “ये हमारे परिवार के भगवान हैं। इतनी जल्दी बेटी को लौटा दिया, क्या कहें!”
मित्र पुलिस का चेहरा चमकाया आशीष-प्रवीण ने
यह घटना उत्तराखंड पुलिस के ‘मित्र पुलिस’ टैग को मजबूत करती है। जहां एक ओर पुलिस पर कई बार सवाल उठते हैं, वहीं आशीष नैनवाल और प्रवीन पुंडीर जैसे जांबाज अफसरों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सबका भरोसा जीत लिया। हाल ही में एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोभाल ने बार बवाल मामले में अपनी मुस्तैदी दिखाकर देहरादून में शांति बहाल की थी, जो इसका ताजा उदाहरण है। पुलिस महकमे में ऐसे अफसरों की मौजूदगी से अपराध नियंत्रण में तेजी आएगी।
चुनौतियां और भविष्य की उम्मीदें
मिसिंग केस, खासकर बच्चों के, हमेशा संवेदनशील होते हैं। देहरादून जैसे व्यस्त शहर में ट्रैफिक, भीड़भाड़ और अज्ञात खतरे बच्चियों के लिए जोखिम बढ़ाते हैं। पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई न केवल एक जान बचाने वाली थी, बल्कि पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हर चौकी और थाने में आशीष नैनवाल व प्रवीन पुंडीर जैसे कर्मठ अधिकारी हों, तो पुलिस केस न्यायपालिका की तरह फास्ट-ट्रैक पर सुलझने लगेंगे। उत्तराखंड पुलिस ने पहले भी कई ऐसे केसों में अपनी क्षमता साबित की है, जैसे हाल के महीनों में कई लापता बच्चों की बरामदगी।
परिजनों का संदेश: पुलिस पर भरोसा रखें
बच्ची के पिता ने कहा, “हमारी पुलिस सच्ची मित्र है। देर रात तक जुटे रहे, कोई शिकायत नहीं।” यह घटना देहरादूनवासियों को संदेश देती है कि संकट में पुलिस का सहारा लें, मदद जरूर मिलेगी।



