उत्तराखण्ड
हल्द्वानी के युवाओं के लिए वैश्विक करियर का नया द्वार, 2,500 करोड़ के निवेश से बना एआई-ऑगमेंटेड स्मार्ट कैंपस

हल्द्वानी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में Dr. Himanshu Tripathi ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में अपार प्रतिभा है, लेकिन वर्ल्ड-क्लास टेक्नोलॉजी और कॉर्पोरेट अवसरों की कमी के चलते उन्हें बड़े शहरों की ओर पलायन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि अब हल्द्वानी और आसपास के छात्र अपने क्षेत्र के निकट रहकर ही एआई, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डेटा साइंस जैसे भविष्य के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम समेत 23 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ एमओयू किए हैं, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ लाइव प्रोजेक्ट्स और रियल-टाइम कॉर्पोरेट अनुभव मिल सके। साथ ही 100 से अधिक कंपनियों के सहयोग से गठित “कॉर्पोरेट एडवाइजरी बोर्ड” छात्रों को करियर गाइडेंस भी प्रदान कर रहा है।
विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 68 विशेष प्रोग्राम शुरू किए हैं, जिनमें 40 अंडरग्रेजुएट, 16 पोस्टग्रेजुएट और 12 लेटरल एंट्री प्रोग्राम शामिल हैं। इसके अलावा 22 मल्टीडिसिप्लिनरी पीएचडी प्रोग्राम भी लॉन्च किए गए हैं, जिनका उद्देश्य रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी छात्रों के लिए यूनिवर्सिटी ने सीयूसीईटी-2026 प्रवेश परीक्षा के माध्यम से 50 करोड़ रुपये तक की स्कॉलरशिप की घोषणा की है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पिछले सत्र में 2,000 से अधिक छात्रों को करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति का लाभ मिला था।
इनोवेशन और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए कैंपस में “कैम्पस टैंक” और “सीयू एआई स्पेस” जैसी पहल शुरू की गई हैं। “कैम्पस टैंक” के माध्यम से अब तक 1,000 से अधिक स्टार्टअप्स को लगभग 50 करोड़ रुपये की फंडिंग से जोड़ा जा चुका है। वहीं “नारी” योजना के तहत छात्राओं को तकनीकी अनुसंधान के क्षेत्र में विशेष अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
प्रेस वार्ता के अंत में Dr. Himanshu Tripathi ने कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि उत्तर भारत के युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने वाला ट्रांसफॉर्मेटिव इकोसिस्टम है, जिसका सबसे अधिक लाभ उत्तराखंड और कुमाऊं क्षेत्र के विद्यार्थियों को मिलेगा।
