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उत्तराखण्ड

एडवांस रोबोटिक सर्जरी से बची कैंसर की गिरफ्त से हल्द्वानी की 61 वर्षीय महिला, बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल ने रचा इतिहास

पवनीत सिंह बिंद्रा

हल्द्वानी, 29 अप्रैल 2026 (स्थानीय संवाददाता)

पोस्ट-मेनोपॉजल ब्लीडिंग: चेतावनी का संकेत, हल्द्वानी महिला की कहानी

  तल्ली बमौरी गांव की 61 वर्षीय गृहिणी श्रीमती पूनम रौतेला पिछले एक माह से असहज लक्षणों से जूझ रही थीं। पोस्ट-मेनोपॉजल ब्लीडिंग (रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव) ने पूरे परिवार को चिंतित कर दिया। स्थानीय जांच में यूटरस की आंतरिक लाइनिंग (एंडोमेट्रियम) मोटी पाई गई, जो कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता था। घबराए परिवार ने बेहतर इलाज की तलाश में नई दिल्ली का रुख किया और बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुंचे। यहां एडवांस जांचों से एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया की पुष्टि हुई—एक प्री-कैंसरस स्थिति, जो अनुपचारित रहने पर 30-50% मामलों में यूटराइन कैंसर में बदल जाती है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों का फैसला: रोबोटिक सर्जरी ही एकमात्र रास्ता

हॉस्पिटल के गायनेकोलॉजिकल सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अल्का दहिया ने केस की समीक्षा की। उन्होंने कहा, “पोस्ट-मेनोपॉजल ब्लीडिंग को कभी हल्के में न लें। यह प्री-कैंसरस या कैंसरस समस्या का अलार्म हो सकता है। श्रीमती रौतेला के मामले में समय पर पहुंचने से हमने कैंसर बनने से पहले हस्तक्षेप किया। हमने रोबोटिक-असिस्टेड टोटल हिस्टरेक्टॉमी के साथ बाइलेटरल सैल्पिंगो-ओफोरेक्टॉमी और लिम्फ नोड सैंपलिंग चुनी। रोबोटिक सिस्टम 10 गुना मैग्निफाइड 3D व्यू और 7 डिग्री फ्रीडम वाली आर्म्स देता है, जो पारंपरिक सर्जरी से कहीं बेहतर प्रिसिजन सुनिश्चित करता है।”

सर्जरी का विवरण: मिनिमली इनवेसिव चमत्कार

सर्जिकल टीम ने da Vinci रोबोटिक सिस्टम का उपयोग कर छोटे-छोटे (1 सेमी) चीरों से प्रक्रिया पूरी की। यूटरस, दोनों ओवरीज़, फॉलोपियन ट्यूब्स और आसपास के लिम्फ नोड्स सफलतापूर्वक हटाए गए। पारंपरिक ओपन सर्जरी में 15-20 सेमी का चीरा और 500-1000 एमएल ब्लड लॉस होता, लेकिन यहां ब्लड लॉस नगण्य रहा। सर्जरी 3 घंटे में संपन्न हुई, बिना किसी कॉम्प्लिकेशन के। यह तकनीक उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों के मरीजों के लिए वरदान है, जहां यात्रा और रिकवरी का समय महत्वपूर्ण होता है।

रिकवरी का आश्चर्यजनक सफर:两天 में चलने लगीं मरीज

सर्जरी के 24 घंटे के अंदर श्रीमती रौतेला ने खाना-पीना शुरू कर दिया और चलने लगीं। डॉ. दहिया ने बताया, “पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी शानदार रही। दर्द न्यूनतम, कोई इंफेक्शन नहीं। 4 दिनों में वे सामान्य कार्य करने योग्य हो गईं। स्ट्रक्चर्ड फॉलो-अप प्लान—मासिक जांच, हार्मोन थेरेपी और लाइफस्टाइल एडवाइस—के साथ डिस्चार्ज किया। अब वे सक्रिय जीवन जी रही हैं।” परिवार ने कहा, “दिल्ली का सफर डरावना था, लेकिन रोबोटिक तकनीक ने भरोसा जगाया।”

इस दौरान चिकित्सक द्वारा व्यापक संदेश:दिए हैं  महिलाओं के लिए स्वास्थ्य जागरूकता जरूरी

यह सफलता बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल की अत्याधुनिक रोबोटिक क्षमताओं को प्रमाणित करती है। डॉ. दहिया की सलाह: “उत्तराखंड की महिलाएं देरी न करें। ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड और बायोप्सी से शुरुआती डिटेक्शन संभव।” हॉस्पिटल ने 5000+ रोबोटिक सर्जरी कर चुका है, जिसमें 95% सफलता दर। यह केस गायनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी में नए मानक गढ़ रहा, खासकर दूरदराज क्षेत्रों के मरीजों के लिए।,,

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