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उत्तराखण्ड

16वें देहरादून किताब कौतिक का भव्य शुभारंभ, 80 हजार पुस्तकों से सजा पुस्तक मेला

 

पद्मश्री बसंती बिष्ट, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत और प्रो. बी.के. जोशी ने किया उद्घाटन, 25 अक्टूबर तक चलेगा आयोजन

देहरादून, 23 अक्टूबर। पहाड़ की संस्कृति, साहित्य और ज्ञान की परंपरा को बढ़ावा देने तथा युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करने के उद्देश्य से 16वें ‘देहरादून किताब कौतिक’ का शुक्रवार को दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में भव्य शुभारंभ हुआ। क्रिएटिव उत्तराखंड के तत्वावधान में आयोजित यह पुस्तक मेला 23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। इस वर्ष मेले की थीम ‘आओ, दोस्ती करें किताबों से’ रखी गई है।

मेले का उद्घाटन दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के संस्थापक प्रो. बी.के. जोशी, प्रख्यात लोक गायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट और पर्यावरणविद् पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। मेले में देशभर के 75 प्रकाशकों की लगभग 80 हजार पुस्तकें पाठकों के लिए उपलब्ध हैं।

युवाओं में जिज्ञासा और रचनात्मकता जगाना उद्देश्य

किताब कौतिक अभियान के संयोजक हेम पंत ने कहा कि किताब कौतिक का उद्देश्य केवल 80 हजार पुस्तकें देहरादून लाना नहीं है, बल्कि युवाओं के मन में जिज्ञासा, रचनात्मकता और पढ़ने की आदत का बीज बोना है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों के माध्यम से नई पीढ़ी को ज्ञान, विचार और साहित्य की दुनिया से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रो. बी.के. जोशी ने किताब कौतिक की सराहना करते हुए इसे एक बेहद महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि आयोजकों को इस आयोजन को हर वर्ष नियमित रूप से आयोजित करना चाहिए।

पद्मश्री बसंती बिष्ट ने कहा कि किताबों में असीम आकर्षण होता है। पुस्तकें हमारी जानकारी का दायरा बढ़ाती हैं और समाज में हमारी पहचान बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

वहीं, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि किताबें जीवन को सुव्यवस्थित करती हैं और सकारात्मक ज्ञान प्रदान करती हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक खतरों पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों को इनके प्रति जागरूक और सतर्क रहने का संदेश दिया।

देहरादून के इतिहास और साहित्य पर हुई चर्चा

किताब कौतिक के पहले सत्र में देहरादून के इतिहास, विरासत और भविष्य पर विस्तार से चर्चा की गई। इतिहासकार अजय शर्मा ने देहरादून के प्राचीन इतिहास, गंगा-यमुना के मध्यवर्ती क्षेत्र की ऐतिहासिक घटनाओं, अशोक के शिलालेखों और बाड़वाला के इतिहास पर प्रकाश डाला।

भारत ज्ञान विज्ञान समिति के अध्यक्ष विजय भट्ट ने वर्ष 1804 के नेपाल आक्रमण, 1803 के भूकंप और वर्ष 1815 में देहरादून के ब्रिटिश शासन के अधीन आने तक की ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया। योगेश भट्ट ने राज्य गठन के बाद देहरादून में तेजी से हुए शहरीकरण, पूर्वी और पश्चिमी नहरों में आए बदलावों तथा पिछले 25 वर्षों में शहर के बदलते स्वरूप पर अपने विचार रखे। इस सत्र का संचालन राहुल कोटियाल ने किया।

दूसरे सत्र में देहरादून के साहित्यिक परिदृश्य पर चर्चा हुई। डॉ. इंद्रजीत सिंह ने एफआरआई से जुड़े वैज्ञानिक एवं साहित्यकार डॉ. पूर्ण सिंह, लीलाधर जगूड़ी और दिवंगत साहित्यकार सुभाष पंत के योगदान को याद किया।

राजेश सकलानी ने देहरादून के साहित्यिक इतिहास पर प्रकाश डालते हुए सरदार पूर्ण सिंह, एम.एन. राय, रशीद जहां, शमशेर बहादुर सिंह और हरिवंशराय बच्चन के दून प्रवास का जिक्र किया। मुकेश नौटियाल ने राजधानी बनने के बाद शहर की व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक बदलावों पर चर्चा करते हुए देहरादून में साहित्यिक संग्रहालय स्थापित करने की मांग उठाई। इस सत्र का संचालन निक्की पुष्कर ने किया।

पुस्तकों का लोकार्पण, सैन्य विरासत पर भी चर्चा

कार्यक्रम के दौरान सुरेंद्र दत्त सेमल्टी की पुस्तक ‘आओ गढ़वाली सीखें’ का लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम का समन्वय ज्योत्सना जोशी ने किया। वहीं, देवेश जोशी की पुस्तक ‘उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन’ का भी लोकार्पण हुआ और पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

उत्तराखंड की सैन्य विरासत’ सत्र में कर्नल सुनील कोटनाला ने सीमाओं पर तैनात उत्तराखंड के सैन्य अधिकारियों और सैनिकों के अदम्य साहस तथा प्रेरणादायक योगदान के उदाहरण साझा किए। इस सत्र का समन्वय शीशपाल गुसाईं ने किया।

साहित्य, कला और संस्कृति की विविध गतिविधियां

तीन दिवसीय किताब कौतिक में पुस्तक प्रदर्शनी के साथ साहित्यिक परिचर्चाएं, करियर काउंसलिंग, विज्ञान कोना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी गतिविधियां, नेचर वॉक और साहसिक खेल आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक संध्याएं, हस्तशिल्प स्टॉल, कठपुतली निर्माण, भाषा एवं संस्कृति तथा वॉल पेंटिंग कार्यशालाएं भी आकर्षण का केंद्र हैं।

मेले में 14 से 18 अक्टूबर तक आयोजित पांच दिवसीय ‘बालप्रहरी बाल लेखन कार्यशाला’ में स्कूली बच्चों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित पुस्तकों का विशेष स्टॉल भी लगाया गया है। यह पहल बच्चों की रचनात्मकता और लेखन प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

उद्घाटन दिवस पर विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ साहित्य, कला एवं संस्कृति से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। किताब कौतिक के माध्यम से देहरादून में पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को पुस्तकों से जोड़ने का संदेश दिया गया।

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