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उत्तराखण्ड

सूचना का अधिकार लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही का मजबूत आधार

 

। सूचना का अधिकार लोकतंत्र की वह महत्वपूर्ण शक्ति है, जो नागरिकों को केवल सरकारी सूचनाएं प्राप्त करने का अधिकार ही नहीं देती, बल्कि शासन को समझने, व्यवस्था से सवाल पूछने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का अवसर भी प्रदान करती है।

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की 21वीं वर्षगांठ के अवसर पर लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए डॉ. आर.एस. टोलिया राज्य स्तरीय सूचना का अधिकार अधिनियम वाद-विवाद प्रतियोगिता-2026 के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में सूचना के अधिकार के महत्व, पारदर्शी शासन और नागरिकों की भागीदारी पर चर्चा की गई।

इस अवसर पर कहा गया कि वर्तमान दौर में तकनीक ने सूचना तक पहुंच को पहले की अपेक्षा अधिक सरल, तेज और व्यापक बना दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल माध्यमों का जिम्मेदार उपयोग आरटीआई से संबंधित जानकारी एवं जागरूकता को प्रदेश के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि पारदर्शिता और जवाबदेही तभी प्रभावी रूप से मजबूत होगी, जब प्रत्येक नागरिक स्वयं को शासन व्यवस्था का सक्रिय सहभागी महसूस करे। सूचना का अधिकार नागरिक और शासन के बीच संवाद को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

इस दिशा में निरंतर प्रयासों के माध्यम से नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए विकसित भारत @2047 के संकल्प में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।

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