उत्तराखण्ड
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की दिव्य उपस्थिति में सम्पन्न हुआ समारोह




हल्द्वानी, 29 अक्टूबर। प्रेम, सादगी, समानता और एकत्व की दिव्य भावना को साकार करते हुए 79वें निरंकारी संत समागम के समापन के उपरांत समालखा के पावन मैदान में सामूहिक सादा विवाह समारोह का भव्य आयोजन किया गया। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की दिव्य उपस्थिति और आशीर्वाद में आयोजित इस समारोह में 126 नवयुगल परिणय सूत्र में बंधे। इस अवसर पर नवविवाहित जोड़ों ने अपने नए जीवन की शुरुआत की और सतगुरु से प्रेम, समर्पण, सुख-शांति तथा खुशहाल दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया।
समारोह में सादगीपूर्ण विवाह के माध्यम से सामाजिक समानता, आपसी सद्भाव और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया गया। विभिन्न राज्यों और देशों से आए नवयुगलों की सहभागिता ने आयोजन को एकत्व, भाईचारे और प्रेम का अनुपम उदाहरण बना दिया।
पारंपरिक जयमाला और निरंकारी सांझा-हार से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक जयमाला एवं निरंकारी सांझा-हार की रस्म के साथ हुआ। मिशन की प्रधान राजकुमारी जी एवं अन्य कार्यकारिणी सदस्यों ने नवविवाहित जोड़ों को सांझा-हार पहनाकर उनके सुखमय वैवाहिक जीवन की मंगलकामना की। इसके बाद हिंदी में भक्तिमय निरंकारी लावों का गायन किया गया, जिनमें विश्वास, सम्मान, प्रेम और समर्पण से परिपूर्ण गृहस्थ जीवन की शिक्षाएं समाहित थीं।
समारोह के अंत में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी ने नवविवाहित जोड़ों पर पुष्पवृष्टि कर उन्हें सुख, शांति और आनंदमय जीवन का आशीर्वाद प्रदान किया।
पति-पत्नी एक-दूसरे के दो पंख बनकर आगे बढ़ें : सतगुरु माता जी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों में नवविवाहित जोड़ों को प्रेरित करते हुए कहा कि सामूहिक विवाह का भाव केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जीवन जीने की शैली के रूप में अपनाना चाहिए। पति-पत्नी को एक-दूसरे की जिम्मेदारियों को समान रूप से निभाते हुए प्रेम, विश्वास और आपसी तालमेल के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। दोनों एक-दूसरे के दो पंख बनकर जीवन की हर परिस्थिति का सामना करें और परस्पर सहयोग से अपने रिश्ते को मजबूत बनाएं।
उन्होंने सेवा, सुमिरन और सत्संग के मार्ग पर चलते हुए एक-दूसरे का सहयोग करने तथा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। सतगुरु माता जी ने कहा कि विवाह जीवनभर प्रेम, आदर और समर्पण के साथ निभाया जाने वाला पवित्र रिश्ता है। दोनों परिवारों के बीच आपसी सम्मान, स्नेह और सद्भाव इस रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने नवदंपतियों को एक-दूसरे की कमियों को सहजता से स्वीकार करने, क्षमा और विनम्रता का भाव बनाए रखने तथा हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर सतगुरु माता जी के परिवार के एक सदस्य का विवाह भी इसी सामूहिक सादा विवाह समारोह में सम्पन्न हुआ।
देश-विदेश के नवयुगलों ने लिया हिस्सा
संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा जी ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित इस समारोह में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से आए नवयुगलों ने भी सहभागिता की। बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड तथा कनाडा से आए 126 नवयुगल इस मंगलमय आयोजन का हिस्सा बने।
विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और संस्कृतियों से जुड़े इन जोड़ों का एक साथ परिणय सूत्र में बंधना सामाजिक एकता, समानता और वैश्विक भाईचारे की अनुपम मिसाल बना। समारोह ने यह संदेश दिया कि भाषा, क्षेत्र और संस्कृति की विविधताओं के बावजूद प्रेम, सद्भाव और मानवता सभी को एक सूत्र में बांधते हैं।
सादगीपूर्ण विवाह से मिला सामाजिक समानता का संदेश
निरंकारी सामूहिक सादा विवाह समारोह ने यह संदेश दिया कि वैवाहिक संबंधों की वास्तविक मजबूती दिखावे या भौतिक आडंबर में नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और समर्पण में निहित है। सादगीपूर्ण आयोजन के माध्यम से समाज को मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने तथा दांपत्य जीवन में आपसी समझ और सहयोग बनाए रखने की प्रेरणा मिली।
सतगुरु के पावन आशीर्वाद के साथ नई जीवनयात्रा शुरू करने वाले सभी 126 नवयुगलों के सुखमय, शांतिपूर्ण और खुशहाल वैवाहिक जीवन की मंगलकामना के साथ यह समारोह प्रेम, सादगी और एकत्व की अविस्मरणीय मिसाल बनकर सम्पन्न हुआ।





