उत्तराखण्ड
वन्यजीव संरक्षण के लिए विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरी: प्राकृतिक आवास व गलियारों की सुरक्षा पर जोर
देहरादून,,वन्यजीव सप्ताह-2026 के समापन समारोह में संरक्षण क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कार्मिक सम्मानित
वन एवं वन्यजीवों का संरक्षण केवल प्रकृति की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और संतुलित भविष्य की जिम्मेदारी भी है। उत्तराखंड की 





वन्यजीव सप्ताह-2026 के समापन समारोह में वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कार्मिकों को सम्मानित किया गया। समारोह में वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
इस अवसर पर कहा गया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान संघर्ष में नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व और समरसता में निहित है। इसके लिए वन्यजीवों के सुरक्षित प्राकृतिक आवास, निर्बाध वन्यजीव गलियारों, स्वच्छ जल स्रोतों और पर्याप्त भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। यह केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उत्तराखंड जैसे जैव विविधता से समृद्ध राज्य में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए वन्यजीवों की निगरानी, उनके आवागमन, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
समारोह में इस बात पर जोर दिया गया कि प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखना ही दीर्घकालिक विकास का आधार है। जंगल सुरक्षित होंगे, वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारे संरक्षित रहेंगे और पर्यावरणीय संतुलन कायम रहेगा, तभी आने वाली पीढ़ियों को उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता विरासत में सुरक्षित रूप से मिल सकेगी।





















