उत्तराखण्ड
पहले डुबोई कांग्रेस की नैया, अब धामी को डुबोएंगे भैया!
**पहले डुबोई कांग्रेस की नैया, अब धामी को डुबोएंगे भैया!
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दलेर मेहंदी से संवाद कर उत्तराखंड की छवि और प्रदेश के सम्मान को बचाने की पहल की। मामला फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचा तो मुख्यमंत्री को प्रदेश की प्रतिष्ठा के लिए माफी मांगनी पड़ी। यह कदम जहां राजनीतिक शालीनता और जिम्मेदारी का संदेश देता है, वहीं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के माफी के बाद दिए जा रहे बयानों पर सवाल उठना भी लाजिमी है।
*जब मुख्यमंत्री प्रदेश की लाज बचाने के लिए आगे आए, तो मंत्री जी का अहंकार क्यों नहीं उतर रहा?**
सवाल किसी एक मंत्री की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के सम्मान का है। माफी मांगने के बाद भी अगर बयानबाजी जारी रहती है, तो इससे जनता के बीच क्या संदेश जाएगा? क्या सरकार में सामूहिक जिम्मेदारी और मर्यादा का कोई मतलब नहीं रह गया है?
कांग्रेस की नैया डुबोने के बाद अब अपने बयानों से धामी सरकार की साख को नुकसान पहुंचाने की नौबत आ गई है। मुख्यमंत्री को तय करना होगा कि प्रदेश की प्रतिष्ठा सर्वोपरि है या किसी मंत्री का अहंकार।
*उत्तराखंड किसी की निजी जागीर नहीं, सवा करोड़ प्रदेशवासियों का सम्मान है!**





