उत्तराखण्ड
गौ-सेवा के संकल्प के साथ गूँजा ‘सीताराम’, कामधेनु प्रकल्प के एक माह के अखंड संकीर्तन का भव्य शुभारंभ

बाघम्बरेश्वर शिव मंदिर से चित्रशिला घाट तक निकली भव्य कलश यात्रा, गोवंश संरक्षण और दुर्घटनाओं में घायल गोवंश की सहायता का लिया संकल्प
हल्द्वानी, 25 अक्टूबर। गौ-सेवा, गोवंश संरक्षण और सामाजिक जन-जागरण के उद्देश्य से कामधेनु प्रकल्प के तत्वावधान में रविवार को एक माह तक चलने वाले अखंड सीताराम संकीर्तन महोत्सव का भव्य शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। गौलापार स्थित बाघम्बरेश्वर शिव मंदिर, बागजाला से निकली कलश यात्रा में स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रभु श्रीसीताराम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
भव्य कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
कलश यात्रा बाघम्बरेश्वर शिव मंदिर से प्रारंभ होकर ‘सीताराम-सीताराम, सीताराम’ के सामूहिक नाम-संकीर्तन के साथ चित्रशिला घाट, रानीबाग पहुँची। इसके बाद यात्रा वापस मंदिर परिसर में संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और प्रभु के नाम-स्मरण के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त की।
आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था को सामाजिक सेवा से जोड़ते हुए सद्भाव, जनसहभागिता और जीवमात्र के प्रति करुणा का संदेश दिया गया। कामधेनु प्रकल्प का उद्देश्य इस महोत्सव को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए समाज में गौ-सेवा की भावना को मजबूत करना और गोवंश के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना है।
सड़क दुर्घटनाओं में घायल गोवंश की सहायता पर जोर
कार्यक्रम में सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले गोवंश की सुरक्षा और उपचार का विषय प्रमुखता से उठाया गया। प्रकल्प की ओर से वाहन चालकों से अपील की गई कि वे सड़कों पर गोवंश दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतें, वाहन की गति नियंत्रित रखें और यातायात नियमों का पालन करें। थोड़ी-सी सतर्कता किसी बेजुबान जीव की जान बचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
प्रकल्प ने सरकार और संबंधित प्रशासनिक विभागों से भी आग्रह किया कि दुर्घटनाओं में घायल गोवंश के त्वरित उपचार, आपातकालीन सहायता और सुरक्षित आश्रय की प्रभावी व्यवस्था की जाए। साथ ही, आमजन से अपील की गई कि घायल अथवा असहाय गोवंश दिखाई देने पर उसकी अनदेखी न करें, बल्कि उसके उपचार और सुरक्षा के लिए संबंधित सेवाओं की मदद लें।
एक माह तक चलेगा अखंड सीताराम संकीर्तन
कामधेनु प्रकल्प के सदस्यों ने संकल्प व्यक्त किया कि एक माह तक चलने वाले अखंड सीताराम संकीर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के साथ गौ-सेवा, गोवंश संरक्षण और सामाजिक जन-जागरण के प्रयासों को भी गति दी जाएगी। प्रकल्प का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ें और गौ-सेवा को समाज के सामूहिक उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार करें।
प्रकल्प के अनुसार, गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। भारतीय नस्लों के गोवंश का संरक्षण, गो-पालन को प्रोत्साहन, निराश्रित पशुओं की देखभाल और दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को समय पर सहायता उपलब्ध कराना ऐसे कार्य हैं, जिनमें जनसहभागिता बेहद आवश्यक है।
आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि धार्मिक आस्था का वास्तविक महत्व तभी व्यापक होता है, जब वह करुणा, संवेदना और सेवा के रूप में व्यवहार में दिखाई दे। ‘गौ-सेवा, जीव-दया और लोककल्याण’ की भावना को केंद्र में रखते हुए कामधेनु प्रकल्प ने आमजन से इस पुनीत अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया।
इनकी रही सहभागिता
कार्यक्रम में कामधेनु प्रकल्प के डॉ. कंचन तिवारी, डॉ. जगदीश पांडे, डॉ. नीरज जोशी, डॉ. चंद्र प्रकाश, डॉ. हेमंत जोशी, पूरन चंद्र भट्ट, डॉ. मोहित जोशी, दिवाकर, पंडित उमेश तिवारी, हरीश चंद्र पंत और भुवन सिंह बिष्ट सहित प्रकल्प के सदस्य उपस्थित रहे।
सभी ने गौ-सेवा, गोवंश संरक्षण और सामाजिक जन-जागरण के इस अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कामधेनु प्रकल्प ने विश्वास जताया कि एक माह तक चलने वाला अखंड सीताराम संकीर्तन महोत्सव आध्यात्मिक साधना के साथ समाज में सेवा, संवेदना और जीवमात्र के प्रति करुणा की भावना को भी मजबूत करेगा।





