उत्तराखण्ड
गांधी जयंती पर ‘गांधी और भारतीयता’ विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित








गांधी के सत्य, अहिंसा और भारतीय जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान
हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में गांधी जयंती के अवसर पर ‘गांधी और भारतीयता’ विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी ने की। मुख्य अतिथि पद्मश्री श्री कल्याण सिंह रावत, मुख्य वक्ता प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी, निदेशक यूजीसी-एमएमटीटीसी, कुमाऊं विश्वविद्यालय तथा विशिष्ट वक्ता प्रो. प्रभाकर बडोनी, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय रहे। कार्यक्रम की संयोजक प्रो. रेनू प्रकाश तथा सह-संयोजक डॉ. शशांक शुक्ल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों, कुलपति एवं विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलगीत और वंदेमातरम् का गायन हुआ। संगीत विभाग के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ तथा ‘रघुपति राघव राजाराम’ की प्रस्तुति देकर गांधी जी के विचारों को संगीतमय अभिव्यक्ति दी।
गांधी और उत्तराखंड के संबंध पर डाला प्रकाश
विशिष्ट वक्ता प्रो. प्रभाकर बडोनी ने महात्मा गांधी के उत्तराखंड से गहरे संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने गांधी जी की उत्तराखंड यात्राओं और विभिन्न स्थानों से उनके जुड़ाव का उल्लेख करते हुए बताया कि गांधी जी ने उत्तराखंड की छह यात्राएं की थीं। हरिद्वार कुंभ से लेकर ताकुला, भवाली, अल्मोड़ा, रानीखेत, ताड़ीखेत, बागेश्वर, कौसानी और मसूरी सहित विभिन्न स्थानों पर गांधी जी के प्रवास एवं विचारों का उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने भारत के लिए हिमालय के महत्व को लेकर गांधी जी के दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया। इस अवसर पर प्रो. बडोनी द्वारा तैयार डॉक्यूमेंट्री ‘उत्तराखंड में गांधी पर्यटन पथ’ का प्रदर्शन किया गया।
गांधी के राजनीतिक चिंतन और भारतीयता पर चर्चा
मुख्य वक्ता प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी ने गांधी जी की भारतीयता और उनके राजनीतिक चिंतन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गांधी जी के राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में योगदान, उनके विचारों की बदलती व्याख्याओं तथा उनके चिंतन की व्यावहारिकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि गांधी जी ने भारतीय जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को नए संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक सामाजिक आधार प्रदान किया। विभिन्न धर्मों और आस्थाओं को स्वतंत्रता आंदोलन की व्यापक धारा से जोड़ने के गांधी जी के प्रयासों तथा सामाजिक जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना पर भी उन्होंने चर्चा की। अपने वक्तव्य को प्रभावी बनाने के लिए प्रो. जोशी ने प्रसिद्ध चित्रकार एम.एफ. हुसैन की कृतियों के माध्यम से गांधी जी के विचारों और भारतीयता के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत किया।
अहिंसा को पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने की जरूरत : कल्याण सिंह रावत
मुख्य अतिथि पद्मश्री श्री कल्याण सिंह रावत ने गांधी जी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधी जी ने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अहिंसा और सत्य को प्रभावी माध्यम बनाया और दुनिया को विचारों एवं सिद्धांतों की शक्ति का परिचय दिया।
उन्होंने अहिंसा के व्यापक अर्थ को वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि मनुष्य व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। इसलिए प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता भी अहिंसा का महत्वपूर्ण पक्ष है।
श्री रावत ने नमक आंदोलन और दांडी मार्च का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड के स्वतंत्रता सेनानी खड़क बहादुर के योगदान को याद किया। उन्होंने नमक आंदोलन के दौरान देहरादून में आंदोलन को आगे बढ़ाने में उनके योगदान तथा महावीर त्यागी से जुड़े न्यायालय प्रसंग का भी उल्लेख किया।
उन्होंने गांधी जयंती सप्ताह को वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में मनाने की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रभावों और उत्तराखंड के वन्यजीवों, पर्यावरण तथा भौगोलिक परिस्थितियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को रेखांकित किया।
गांधी के मूल्यों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि : कुलपति
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी ने सभी अतिथियों एवं वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए गांधी जी के अहिंसा सिद्धांत और उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि गांधी जी और लाल बहादुर शास्त्री ने कठिन परिस्थितियों को स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण की दिशा में परिवर्तनकारी अवसरों में बदला।
कुलपति ने गांधी जी के विचारों की वैश्विक प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व के विभिन्न देशों और समाजों ने गांधी जी के विचारों को अपने-अपने संदर्भों में समझा और अपनाया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के स्वतंत्रता संघर्ष के संदर्भ में गांधी जी की भूमिका का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि गांधी जी ने अपनी पुस्तकों और रचनाओं के माध्यम से समाज के अनेक प्रश्नों पर विचार प्रस्तुत किए हैं। विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय परिवार से गांधी जी एवं लाल बहादुर शास्त्री के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों महापुरुषों के आदर्शों को व्यवहार में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान होगा।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री खेमराज भट्ट ने अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ मुख्य कार्यक्रम का समापन हुआ।
इसके बाद गांधी जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों एवं शिक्षार्थियों ने श्रमदान भी किया। कार्यक्रम में प्रो. राकेश चंद्र रयाल, प्रो. एम.एम. जोशी, डॉ. दीपांकुर जोशी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं शिक्षार्थी उपस्थित रहे।

















