उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित






सेवा नियमों, अनुशासन, पत्रावली प्रबंधन और शासकीय पत्राचार की प्रक्रियाओं पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण
हल्द्वानी, 24 अक्टूबर। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र (सीका) के तत्वावधान में 22 एवं 23 अक्टूबर को दो दिवसीय क्षमता वर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों एवं अनुभाग सहायकों को सेवा नियमों, अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं, पत्रावली प्रबंधन तथा शासकीय पत्राचार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। उत्तराखण्ड शासन के पूर्व अपर सचिव किशन नाथ ने विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रतिभागियों को प्रशासनिक नियमों एवं कार्यालयी प्रक्रियाओं की जानकारी दी।
कार्यशाला का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी, सीका के निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे, अतिरिक्त निदेशक प्रो. गगन सिंह, कुलसचिव खेमराज भट्ट तथा विषय विशेषज्ञ किशन नाथ ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान प्रो. गगन सिंह ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने विषय विशेषज्ञ किशन नाथ को पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था से बेहतर होंगे शैक्षणिक परिणाम
कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए सीका के निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने कहा कि विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों के संचालन के लिए सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है। प्रशासनिक कार्यों में दक्षता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होने से विश्वविद्यालय की समग्र कार्यप्रणाली बेहतर होती है। उन्होंने कहा कि क्षमता वर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान में निरंतर सुधार लाने तथा अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रशासनिक अधिकारी एवं अनुभाग सहायक किसी भी संस्थान की कार्यप्रणाली की रीढ़ होते हैं। नियमों की सही जानकारी, पारदर्शी कार्यशैली और उत्तरदायित्वपूर्ण व्यवहार संस्थान की प्रगति के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को दैनिक कार्यों में लागू करने पर जोर दिया।
वहीं, कुलसचिव खेमराज भट्ट ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से कार्यालयी कार्यों में होने वाली त्रुटियों को कम करने के साथ कर्मचारियों का आत्मविश्वास और कार्यक्षमता भी बढ़ती है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता पर बल दिया।
सेवा नियमों से लेकर विभागीय जांच तक दी गई जानकारी
कार्यशाला के प्रथम दिवस में राजकीय सेवा की सामान्य शर्तों, सेवा पुस्तिका के रखरखाव, अवकाश नियमों, स्थायीकरण, ज्येष्ठता निर्धारण, पदोन्नति तथा धारणाधिकार (लियन) से संबंधित प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही आचरण नियमों, सत्यनिष्ठा, नैतिकता, वित्तीय एवं प्रशासनिक ईमानदारी तथा कार्यस्थल पर व्यावसायिक व्यवहार के महत्व की जानकारी दी गई।
दूसरे दिन अनुशासन एवं अपील नियमों, कदाचार की अवधारणा, विभागीय जांच, आरोप-पत्र जारी करने की प्रक्रिया, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों तथा अपील एवं पुनरीक्षण से संबंधित प्रावधानों पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है।
पत्रावली प्रबंधन और शासकीय पत्राचार पर व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला में कार्यालयी पत्रावलियों के प्रबंधन एवं निस्तारण प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसके अंतर्गत डाक प्राप्ति, डायरी एवं ई-ऑफिस में प्रविष्टि, नोटिंग-ड्राफ्टिंग, समयबद्ध निस्तारण और अभिलेखों के सुरक्षित रखरखाव की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
इसके अतिरिक्त कार्यालय आदेश, कार्यालय ज्ञापन, परिपत्र, अधिसूचना, अर्द्धशासकीय पत्र एवं ज्ञापन जैसे शासकीय पत्राचार के विभिन्न प्रारूपों की संरचना और उनके उचित प्रयोग के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को तथ्यपरक, संक्षिप्त एवं नियमानुकूल टिप्पणियां तैयार करने तथा कार्यालयी पत्राचार में एकरूपता बनाए रखने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने सेवा नियमों, अनुशासनात्मक कार्यवाही और कार्यालयी प्रक्रियाओं से जुड़ी व्यावहारिक समस्याएं विषय विशेषज्ञ के समक्ष रखीं। विशेषज्ञ ने इन समस्याओं पर मार्गदर्शन देते हुए प्रशासनिक कार्यों में नियमों के अनुपालन और पत्रावलियों के अनावश्यक विलंब को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भविष्य में भी आयोजित होंगे क्षमता वर्धन कार्यक्रम
कार्यशाला के समापन अवसर पर कुलसचिव खेमराज भट्ट एवं विषय विशेषज्ञ किशन नाथ के प्रति आभार व्यक्त किया गया। साथ ही प्रतिभागियों से प्रशिक्षण संबंधी फीडबैक देने का आग्रह किया गया, ताकि भविष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को और अधिक उपयोगी एवं प्रभावी बनाया जा सके।
कार्यशाला में प्राप्त अनुभवों के आधार पर वर्ष में कम से कम दो बार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने, प्रशासनिक नियमों एवं पत्राचार के प्रारूपों पर आधारित संक्षिप्त हैंडबुक तैयार करने तथा ई-ऑफिस एवं डिजिटल पत्रावली निस्तारण पर केंद्रित प्रशिक्षण आयोजित करने की संस्तुति की गई।
विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यशाला को प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा कार्यालयी प्रक्रियाओं को समयबद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। उम्मीद जताई गई कि प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक होगी।





